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मिलर्स पर प्रशासन मेहरबान, गड़बड़ी मिलने पर लगाया केवल जुर्माना, एफआइआर से किया किनारा
ईओडब्ल्यू भी कर रही है मामले की जांच

बालाघाट । समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान के सार्टेज और कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी मामले में भले ही प्रशासन ने बड़ी कार्यवाही की है। लेकिन प्रशासन ने मिलर्स पर मेहरबानी भी दिखाई है। गड़बड़ी मिलने पर 93 राइस मिलर्स पर 18 लाख 55 हजार रुपए का केवल जुर्माना लगाया है। जबकि इसी मामले में ईओडब्ल्यू ने भी जांच की है। करीब 22 समितियों पर एफआइआर दर्ज कराई है। वहीं सिवनी जिले की एक मिल को सील किया है।
जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान से कस्टम मिलिंग करने वाले राइस मिलर्स पर कलेक्टर मृणाल मीणा ने कड़ी कार्यवाही की है। जबकि जिले में खरीदी गई धान के मामले में ईओडब्ल्यू की जांच अभी चल रही है। वहीं मिलर्स के सरकारी धान की काला बाजारी के खबरें जिले में अखबार की सुर्खियां बटोर चुकी है। जिसके आधार पर कलेक्टर मृणाल मीणा ने एक जांच दल का गठन किया था जिसमें खाद्य आपूर्ति विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक, कृषि उपज मंडी और वेयर हाउस कार्पोरेशन के अधिकारियों को शामिल किया था। जांच दल में शामिल अधिकारियों ने कस्टम मिंलिग के लिये अनुबंध करने वाले 122 राइस मिलर्स की गहन जांच कराई गई। जांच में 93 राइस मिलों में गभीरता अनियमितताएंं पाई गई। धान और चावल के स्टाक में भारी मात्रा में अंतर पाया गया।
प्रतिवेदन के आधार पर लगाया जुर्माना
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जांच दल द्वारा 122 राइस मिलों की जांच की गई। जिसमें 93 मिलों में गड़बड़ी पाई गई। जिसके बाद जांच प्रतिवेदन विभाग को सौंपा गया। प्रस्तुत किए गए प्रतिवेदन के आधार पर मिलर्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। जवाब संतोषप्रद नहीं होने के कारण मिलर्स पर कार्यवाही की गई। इस मामले में कलेक्टर मृणाल मीणा ने 93 राइस मिलर्स के विरूद्ध धान और चावल का सार्टेज मिलने पर 18 लाख 55 हजार रुपए का अर्थदण्ड लगाया है। यह उल्लेखनीय है की कस्टम मिंलिग के बाद मिलर्स द्वारा प्रदाय की गई धान के एवज में नागरिक आपूर्ति निगम को 65 प्रतिशत और भारतीय खाद्य निगम को 35प्रतिशत चावल जमा कराया जाना था। लेकिन विभागीय जांच में अलग-अलग स्तर पर कमी पाई गई। प्रशासन ने इस मामले में मिलर्स को हिदायत देते हुये अर्थदण्ड लगाया है।
समितियों पर एफआइआर दर्ज तो मिलर्स पर रहम क्यों
कस्टम मिलिंग के नाम पर राइस मिलर्स ने शासन को क्षति पहुंचाई है। बावजूद इसके मिलर्स पर प्रशासन ने दरियादिली दिखाई है। जबकि शासकीय धान में गड़बड़ी करने के मामले में अमानत में खयानत का मामला दर्ज कराया जाना चाहिए। इधर, समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के मामले में गड़बड़ी आने पर ईओडब्ल्यू ने जांच कर जिले की करीब 22 समितियों पर एफआइआर दर्ज कराई है। लेकिन राइस मिलर्स द्वारा गड़बड़ी किए जाने पर उन्हें बख्शा जा रहा है। चुंकि इस वर्ष कस्टम मिलिंग के लिए अनुबंध करने वाले राइस मिलर्स ने धान का उठाव सीधे धान खरीदी केंद्रों से किया है। जिसे दूसरे राज्यों या जिलों में बेचकर शासन को निम्न स्तर का चावल सप्लाई कर दिया है। इस मामले में प्रशासन की ही जांच में कुछेक मिलों में खामियां भी सामने आई है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन की जांच में 93 मिलों में गड़बड़ी सामने आई है। फिर इन 93 मिलर्स पर अपराधिक प्रकरण क्यों दर्ज नहीं किया जा रहा है, यह अबूझ पहेली बनी हुई है। प्रशासन की इस कार्यवाही पर भी अब अनेक सवाल उठने लगे हैं।
इनका कहना है
कलेक्टर के निर्देश पर गठित दल द्वारा 122 राइस मिलों की जांच कराई गई। जांच के दौरान 93 राइस मिलों में धान और चावल के स्टाक में अंतर पाया गया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासन द्वारा मिलर्स के विरूद्ध पेनाल्टी लगाई गई है। 93 मिलर्स पर 18 लाख 55 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। कस्टम मिंलिग कार्य में अब लगातार निगरानी रखी जा रही हैै।
-आरके ठाकुर, प्रभारी जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम, बालाघाट

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