एजेपी अध्यक्ष का आरोप, सीबीआई से जांच कराने की मांग
दिस्पुर। असम जातीय परिषद (एजेपी) ने गुजरात के गिर से लाई गईं 90 गाय बीजेपी के एक मंत्री की पत्नी, एक सांसद और विधायकों समेत कई व्यक्तियों को बेचे जाने का आरोप लगाया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की। पीएम मोदी को लिखे पत्र में एजेपी के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने असम के सीएम हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व वाली असम सरकार पर 2021 में शुरू की गई गोरुखुटी बहुउद्देशीय कृषि परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि असम में हाल ही में घोर अनियमितताएं, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, साथ ही भारतीय संस्कृति में माता के रूप में पूजी जाने वाली गाय के साथ अपवित्रता व सार्वजनिक विश्वासघात का शर्मनाक कृत्य भी सामने आया है। गोगोई ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं है, यह अनैतिक, अधार्मिक और अत्यंत अमानवीय कृत्य है, जिसने लाखों लोगों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
गोगोई ने कहा कि यह मामला जुलाई 2021 में शुरू की गई गोरुखुटी बहुउद्देशीय कृषि परियोजना से संबंधित है, जिसके तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ समझौते के जरिए गुजरात से 300 गिर गाय खरीदी गई थीं। उन्होंने कहा कि अब गंभीर आरोप सामने आए हैं। 2-3 अप्रैल 2022 को रंगिया रेलवे स्टेशन लाए जाने के बाद कुल 90 गिर गायें लापता हो गईं। मुख्यमंत्री और परियोजना अध्यक्ष के विरोधाभासी बयानों ने जनता के संदेह को और गहरा कर दिया है और विश्वास खत्म हो गया है।
विपक्षी नेता ने कहा कि असम के लोग पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि गाय शुद्धता और मातृत्व की प्रतीक हैं और सत्ता में बैठे लोगों को इन्हें व्यावसायिक इस्तेमाल की वस्तु नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि गोरुखुटी परियोजना के तहत गिर गायों की खरीद, संरक्षण, वितरण और उसके बाद उनकी बिक्री या गायब होने समेत पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए।
