
पत्नी ने कहा – वे एक मदरसे में शिक्षक थे माफी नहीं, सजा मिले
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के बैला गांव में ग़म और गुस्से का माहौल है। यहां रहने वाले मौलाना कारी मोहम्मद इकबाल की 7 मई को पाकिस्तान की बमबारी में मौत हो गई थी। वे एक मदरसे में शिक्षक थे और जामिया जिया-उल-उलूम में पढ़ाया करते थे। लेकिन उनकी शहादत के बाद कुछ मीडिया चैनलों ने उन्हें पाकिस्तानी आतंकी और लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर बता दिया था।
मीडिया में झूठी खबरें चलने के बाद उनके परिवार ने न्याय की लड़ाई शुरु की है, जो कि अभी जारी है। दरअसल शिक्षक कारी मोहम्मद की पत्नी नसीम अख्तर ने दो बड़े मीडिया संस्थानों को 5-5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है और कहा है कि माफ़ी से बात नहीं बनेगी, मेरे पति को आतंकी बताकर अपमानित किया गया, उनके शहीद होने को झूठा कहा गया। उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए। नसीम अख्तर का कहना है कि उनके पति देशभक्त थे और अपने छात्रों को शिक्षित करने में जीवन लगा दिया। उन्होंने कभी देश विरोधी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया। भावुक हुईं नसीम कहती हैं कि उन्होंने कभी हथियार नहीं उठाया, सिर्फ क़लम उठाई थी।
एफआईआर दर्ज, मीडिया पर बढ़ता दबाव
पुंछ पुलिस ने इन मीडिया संस्थानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। यह मामला अब सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि मीडिया की जवाबदेही और प्रेस की नैतिकता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
माफी पर ऐतराज
हालांकि कुछ चैनलों ने अपनी रिपोर्ट पर माफी मांगी है, लेकिन परिवार इस पर संतुष्ट नहीं है। उनका साफ़ कहना है कि मीडिया ने देश के एक सच्चे शिक्षक को आतंकवादी बता दिया और अब एक माफ़ी से सब ठीक नहीं हो सकता।
