
छिंदवाड़ा — सांझी-पहल फाउंडेशन ने पहल केंद्र के बच्चों के लिए विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष मी क्षमतावर्धन कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, टीमवर्क, रचनात्मक सोच, और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यशाला में बच्चों ने अनेक रोचक और शैक्षिक गतिविधियों में भाग लिया, जिससे उनके व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक और भावनात्मक कौशल भी सशक्त हुए।
कार्यशाला की शुरुआत सांझी पहल फाउंडेशन की व्यवस्थापक रीना डोंगरे द्वारा संस्था की संक्षिप्त जानकारी बताकर किया गया, परियोजना समन्वयक (Project Coordinator) नेहा इंदोरकर द्वारा “नेम गेम” (Name Game) से हुई। इस गतिविधि में सभी बच्चों को एक कागज़ पर अपना नाम लिखने और अपने नाम के पहले अक्षर से शुरू होने वाला एक सकारात्मक गुण लिखने के लिए कहा गया। इस खेल ने बच्चों को स्वयं के बारे में सोचने, अपनी पहचान समझने और अपने गुणों को पहचानने का अवसर दिया।

इसके बाद नेहा इंदोरकर ने सभी बच्चों को सामग्री वितरित की और समूहों में विभाजित कर “ब्रिज बनाने” का कार्य सौंपा। बच्चों को स्ट्रॉ, टेप, क्लिप्स आदि सामग्री दी गई और समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से एक मज़बूत पुल बनाना था। गतिविधि के बाद सभी समूहों ने अपने अनुभव साझा किए, पुल बनाने में आई चुनौतियाँ, समाधान, और टीमवर्क से मिली सीखों पर चर्चा हुई। इस अभ्यास ने बच्चों को यह सिखाया कि सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन कार्य भी पूरा किया जा सकता है।

सोनम सहारे (कार्यकर्ता) ने, तीसरी गतिविधि में बच्चों को रंग और ड्राइंग शीट दी गई, जिसके माध्यम से उन्होंने हाथों की छाप (Hand Prints) से एक विशाल रंगीन पेड़ बनाया। इस पेड़ ने एक गहरा संदेश दिया , “हर बच्चे का जीवन रंगों से भरा होता है, हर व्यक्ति अद्वितीय है और हम सभी अपने जीवन में कई लोगों से रंग और ऊर्जा प्राप्त करते हैं, साथ ही हम भी दूसरों के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।”
इसके बाद सभी बच्चों ने मिलकर एक गीत गाया “बच्चों के अधिकार में शामिल एक आवाज़ हमारी है”। इस गीत ने बच्चों में एकजुटता और अपने अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाया। दोपहर के भोजन में सभी ने डब्बा पार्टी का आनंद लिया, जिसमें बच्चों ने एक-दूसरे के साथ अपना खाना साझा किया। यह साझा भोजन न केवल आपसी अपनापन और एकता को बढ़ावा देता है, बल्कि “साझी पहल” संस्था के मूल सिद्धांत साझा प्रयास और सहयोग को भी दर्शाता है।
कार्यशाला के दौरान आउटडोर गेम “अजुगुजा” का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी बच्चे बड़े समूह में शामिल होकर हँसी-खुशी के साथ खेले। इस खेल ने बच्चों की शारीरिक सक्रियता, समन्वय और टीम भावना को बढ़ाया।

इसके बाद बाल अधिकार (Child Rights) पर एक विस्तृत सत्र हुआ, जिसमें बच्चों को बाल अधिकारों का इतिहास, इनकी आवश्यकता, और चार मुख्य बाल अधिकार —
जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार
शिक्षा का अधिकार
सुरक्षा का अधिकार
भागीदारी का अधिकार- के बारे में बताया गया। सत्र में चर्चा हुई कि अगर बाल अधिकारों का पालन नहीं होता तो बच्चों का विकास रुक जाता है, वे हिंसा और शोषण के शिकार बनते हैं, और समाज का भविष्य कमजोर हो जाता है।
कार्यशाला के अंत में बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए और यह स्वीकार किया कि इस तरह के सत्र और गतिविधियाँ उन्हें नई सोच, आत्मविश्वास और अपने अधिकारों को समझने की शक्ति देती हैं।
सांझी-पहल फाउंडेशन का मानना है कि बच्चों को सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल, आत्मनिर्भरता और अपने अधिकारों की जानकारी भी मिलनी चाहिए, ताकि वे एक सशक्त और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकें। यह कार्यशाला छिंदवाड़ा ज़िले में बच्चों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। संस्था भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और समुदाय के साथ मिलकर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
