तत्कालीन नगर रचनाकार, पूर्व नगर सेवक और उनका बेटा भी हुआ गिरफ्तार

20 अगस्त तक सभी आरोपी ईडी की हिरासत में
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने मुंबई से सटे वसई-विरार महानगरपालिका के तत्कालीन आयुक्त अनिल कुमार पवार को गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को ईडी ने अनिल पवार समेत तत्कालीन नगर रचनाकार वाई.एस. रेड्डी, पूर्व नगरसेवक सीताराम गुप्ता और उनके बेटे अरुण गुप्ता को भी गिरफ्तार किया है। अनिल पवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 20 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। आपको बता दें कि ईडी ने 30 जुलाई, 2025 को वसई-विरार के पूर्व मनपा आयुक्त अनिल कुमार पवार के घर पर छापा मारा था। उन्हें मुंबई महानगर क्षेत्र के एसआरएस का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। उनके विदाई समारोह के बाद ईडी ने कार्रवाई शुरू की। वसई-विरार इलाके में आरक्षित 60 एकड़ के भूखंड पर 41 अनधिकृत इमारतों के निर्माण के भ्रष्टाचार मामले में ईडी ने पूर्व मनपा आयुक्त अनिल कुमार पवार से पूछताछ की। अनिल कुमार पवार और उनके परिवार से 22 घंटे तक पूछताछ की गई। 4 अगस्त को उनकी पत्नी और बेटी को बुलाकर पूछताछ की गई। इसके बाद अनिल कुमार पवार की पत्नी से 10 घंटे तक पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया। वह सुबह साढ़े दस बजे पूछताछ के लिए वर्ली स्थित सीजे हाउस स्थित ईडी कार्यालय आए थे। वह रात पौने दस बजे अपनी पत्नी के साथ कार्यालय से निकले। ईडी ने अनिल कुमार पवार पर अनधिकृत निर्माण मामले में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। ईडी की प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि अनिल कुमार ने 20 से 25 रुपये प्रति वर्ग फुट की रिश्वत ली थी।
ईडी के अधिकारियों ने 29 जुलाई को अनिल कुमार पवार के आवास समेत 12 जगहों पर छापेमारी की थी। उस समय नासिक स्थित उनके भतीजे के घर से 1 करोड़ 33 लाख रुपये की नकदी मिली थी। पूर्व आयुक्त अनिल कुमार पवार शिक्षा मंत्री दादा भुसे के दामाद हैं। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के सतना के रहने वाले हैं। इस बीच, इस कार्रवाई के बाद संजय राउत ने सीधे तौर पर दादा भुसे पर निशाना साधा है। राउत ने एकनाथ शिंदे के समय में अनिल कुमार पवार की अवैध रूप से नियुक्ति होने का आरोप लगाया। उधर बुधवार को पूछताछ के बाद, अनिल कुमार पवार के साथ-साथ मनपा के नगर रचनाकार वाई.एस. रेड्डी, अवैध निर्माण मामले के मुख्य मास्टरमाइंड सीताराम गुप्ता और उनके बेटे अरुण गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले से जुड़े लोगों पर ईडी द्वारा की गई छापेमारी में 8 करोड़ 94 लाख रुपये की नकदी, 23 करोड़ 25 लाख रुपये के हीरे और सोने के आभूषण, 13 करोड़ 86 लाख रुपये के शेयर, म्यूचुअल फंड में निवेश और बैंकों में जमा राशि बरामद हुई।
छापे में मिली थी नकदी
29 जुलाई को ईडी ने अनिल कुमार पवार के आवास समेत 12 जगहों पर छापेमारी की। नासिक में उनके भतीजे के घर से 1 करोड़ 33 लाख रुपये नकद मिले। रिश्तेदारों के नाम और बेनामी संपत्ति के दस्तावेज भी मिले। ईडी ने अनिल कुमार पवार पर वसई-विरार इलाके में हुए निर्माण में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। इस मामले में ईडी की शुरुआती जांच में पता चला है कि उन्होंने 20 से 25 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से रिश्वत ली। वहीं, ईडी ने तत्कालीन नगर रचनाकार वाई.एस.रेड्डी पर 41 इमारतों के लिए 10 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। इस मामले में जूनियर इंजीनियर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कई एजेंट भी शामिल हैं। इस मामले में मीरा-भायंदर पुलिस थाना में कई मामले दर्ज किए गए हैं।
20 अगस्त तक ईडी की हिरासत में
वसई-विरार महानगरपालिका के पूर्व आयुक्त अनिल कुमार पवार और अन्य आरोपियों को 20 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। सभी आरोपियों को गुरुवार को मुंबई सत्र न्यायालय स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया। इस मामले की सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश आर.बी.रोटे के समक्ष हुई। ईडी का प्रतिनिधित्व कर रही अधिवक्ता कविता पाटिल ने अदालत में तर्क दिया कि इस अपराध की गंभीरता बहुत अधिक है। यह बड़ा वित्तीय घोटाला आपराधिक साजिश और मिलीभगत के जरिए किया गया है। सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों ने अपनी शक्तियों और कानूनों का दुरुपयोग करके केवल वित्तीय लाभ के लिए यह भ्रष्टाचार किया है। साथ ही, उन्होंने प्रारंभिक जाँच के दौरान जाँच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया। इसके अलावा, इसमें कई लोगों के वित्तीय हितों की रक्षा की गई है, इसलिए चूँकि इसमें गहन जाँच आवश्यक है, इसलिए ईडी ने इन चारों आरोपियों की 10 दिन की हिरासत मांगी है। जिसके बाद कोर्ट ने उन सभी आरोपियों को 20 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
