Spread the love

नए मीटर लगने के बाद से ही आ रहे बढ़े हुए बिजली के बिल
छिंदवाड़ा। जिले में बिजली उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर असंतोष चरम पर पहुंच गया है। जब सरकार ने इन मीटरों की स्थापना की थी, तो दावा किया गया था कि इससे बिलिंग प्रक्रिया पारदर्शी होगी, बिजली चोरी पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलेगी। लेकिन हकीकत में उपभोक्ता कह रहे हैं कि यह व्यवस्था उनके बजट पर बोझ डाल रही है, उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 30 फीसदी तक की बढोत्तरी हुई है। पिछले कुछ महीनों से उपभोक्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर से आने वाले बिजली बिल उनकी आय की तुलना में कहीं अधिक हैं। खासकर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों के लिए यह नई व्यवस्था सुविधा के बजाय सजा बन गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मामूली देरी पर बिजली काट दी जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के रोजमर्रा के काम ठप हो जाते हैं। उपभोक्ताओं ने बताया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ही बिल बढ़े हुए आ रहे है। शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगर विभाग के कर्मचारियों की माने तो पिछले पिछले सप्ताह ७० से अधिक शिकायते बढ़े हुए बिजली बिल की आई है। जिसमें कुछ बिलों में सुधार किया गया है।
पूरे जिले में उठ रही नाराजगी की आवाज
यह असंतोष केवल शहरी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से भी यह शिकायते सामने आ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल 10 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कई ग्रामीण इलाकों में तो लोग पहले ही मीटर हटाने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है, यह सिर्फ बिजली का मुद्दा नहीं, यह आम आदमी के जीवन स्तर पर सीधा हमला है। तकनीक तभी फायदेमंद है, जब वह जनता का जीवन आसान करे, न कि उसे कर्ज और तनाव में डाले।
इनका कहना है
छापाखाना निवासी आशु गुप्ता का कहना है कि अगर बिल 2000 रुपए से कम भी है, तो भी कभी-कभी बिना कारण बिजली काट दी जाती है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं, ऊपर से यह स्मार्ट मीटर हमारे जीवन में नई मुसीबत बन गया है। रीडिंग और बिलिंग में पारदर्शिता नहीं है, और शिकायत करने पर केवल औपचारिक जवाब मिलते हैं।सावलेवाड़ी निवासी शोएब खान का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका बिजली बिल उनकी मासिक आय के बराबर आने लगा है। एक दिन की देरी से भी बिजली काट दी जाती है। पहले महीने का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और राशन पर खर्च होता था, लेकिन अब आधा पैसा बिजली के बिल में चला जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *