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बेंगलुरु। मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) की ओर से भूखंड के आवंटन में अनियमितताओं के मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को क्लीन चिट दी गई है। कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस की अध्यक्षता वाले आयोग ने 31 जुलाई को अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को सौंपी थी। कैबिनेट के फैसलों के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए एचके पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार को क्लीन चिट दे दी गई है। इससे पहले लोकायुक्त पुलिस ने भी सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती और दो अन्य आरोपियों को इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी। इस बीच, न्यायमूर्ति एचएन नागमोहन दास आयोग की एक रिपोर्ट को भी मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया। इस आयोग ने 2019-20 से 2022-23 के बीच बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका की ओर से किए गए कार्यों में विसंगतियों की जांच की थी। उस समय भाजपा सत्ता में थी।
कानून व संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कहा, सरकार ने न्यायमूर्ति देसाई की अध्यक्षता में सदस्यीय आयोग का गठन किया था, जिसने दो खंडों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। इसमें विभिन्न आधारों पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। मंत्रिमंडल ने रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।पाटिल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने किसानों, छात्रों और कन्नड़ कार्यकर्ताओं आदि से जुड़े 60 पुलिस मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। मंत्री ने मामलों पर आगे कोई ब्यौरा साझा नहीं किया। मंत्रिमंडल ने बेंगलुरू मेट्रो रेल परियोजना के तीसरे चरण के दो कॉरिडोर के साथ 37.121 किलोमीटर लंबे रोड के निर्माण को भी मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने कोप्पल, बादामी में पार्टी कार्यालय के निर्माण के लिए कांग्रेस भवन ट्रस्ट को भूमि पट्टे पर देने को भी मंजूरी दे दी। साथ ही कर्नाटक प्रबंधन नियम, ई-साक्ष्य 2025 को नोटिफाई करने को भी मंजूरी दी गई।

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