
चैन्नई। तमिलनाडु की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की करीबी सहयोगी वीके शशिकला एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। सीबीआई ने एक एफआईआर में आरोप लगाया है कि नोटबंदी के दौरान शशिकला ने 450 करोड़ रुपये नकद देकर कांचीपुरम स्थित एक शुगर मिल खरीदी थी। यह सौदा नोटबंदी के दौरान उस समय हुआ जब पूरे देश में कैश की भारी किल्लत थी। गौरतलब है कि जयललिता की मृत्यु के बाद एआईएडीएमके में ससिकला को बड़ा नेता माना जाने लगा था। हालांकि, भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जाने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका सीमित हो गई। अब इस ताजा खुलासे से उनकी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।
एफआईआर में इनकम टैक्स विभाग के 2020 के एक आदेश का भी जिक्र है। आदेश में कहा गया था कि नवंबर 2017 में बेनामी एक्ट के तहत शशिकला और उनके सहयोगियों की संपत्तियों पर छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए थे। इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ था कि 2016 की नोटबंदी के दौरान पटेल ग्रुप की एक मिल को खरीदने के लिए 450 करोड़ रुपये नकद में दिए गए थे। यह मामला पद्मादेवी शुगर्स लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी के निदेशकों पर इंडियन ओवरसीज बैंक को करीब 120 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इस मामले की जांच सीबीआई की बैंकिंग, सिक्योरिटीज और फ्रॉड शाखा (बेंगलुरु) कर रही है। जुलाई में दर्ज हुई इस एफआईआर के बाद अगस्त में चेन्नई, त्रिची और तेनकासी में सीबीआई की टीमों ने छापेमारी की थी।
सीबीआई के मुताबिक, पद्मादेवी शुगर्स लिमिटेड के निदेशकों पर बैंक से धोखाधड़ी करने का आरोप है और यह सौदा भी उसी संदर्भ में जांच के घेरे में है। एजेंसी का कहना है कि वह इस मामले में मिले दस्तावेजों और गवाहियों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राजनीतिक हलकों में पहले से ही तमिलनाडु की राजनीति में ससिकला की संभावित वापसी की चर्चाएं चल रही थीं। अब देखना होगा कि इस नए विवाद का उनकी सियासी संभावनाओं पर क्या असर पड़ता है।
