सुलह व समझौते से आपसी विवादों का हुआ अंत

दमोह : म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार परस्पर समझौते के आधार पर त्वरित एवं सुलभ न्याय दिये जाने के उद्देश्य से नेशनल लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय दमोह तथा तहसील न्यायालय, हटा, पथरिया, तेंदूखेड़ा में प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह सुभाष सोलंकी के मार्गदर्शन में किया गया। जिला मुख्यालय दमोह पर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी के द्वारा ए.डी.आर. भवन में दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने कहा कि लोक अदालत को उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। जिससे पक्षकारों को त्वरित व शीघ्र न्याय प्राप्त हो सके। आपने अधिवक्ताओं द्वारा अब तक किये गये प्रयासों की *प्रशंसा* की और कहा कि आज आयोजित होने वाली लोक अदालत भी अधिवक्ताओं के सहयोग से सफल होगी। शुभारंभ कार्यक्रम के उपरांत प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों के द्वारा परिसर में स्थापित विभिन्न विभागों के स्टाॅल का भ्रमण किया और प्रकरणों के निराकरण की प्रगति की जानकारी ली।

जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चैरसिया द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि उक्त नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य दांडिक, सिविल, चैक अनादरण, वाहन दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा, वैवाहिक मामले, विद्युत से संबंधित प्रकरणों के साथ-साथ बैंकों, दूरसंचार, विद्युत एवं नगर पालिका के प्रिलिटिगेशन प्रकरणों को निराकरण हेतु रखा गया था। इस हेतु जिला मुख्यालय दमोह एवं तहसील हटा, पथरिया व तेंदूखेड़ा हेतु कुल 24 खण्डपीठों का गठन किया गया है। प्रकरणों के निराकरण हेतु प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा नेशनल लोक अदालत खंडपीठों में पहुंचकर उपस्थित पक्षकारों व अधिवक्तागण को राजीनामा के आधार पर अपने प्रकरण का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से किये जाने हेतु प्रेरित किया गया। परिणामस्वरूप इस नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना के 66 प्रकरणों में कुल 3 करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित किये गये। इसके अतिरिक्त न्यायालयों में लंबित 119 विद्युत, 16 वैवाहिक, 105 चैक अनादरण, 292 दांडिक प्रकरणों सहित कुल 682 प्रकरणों का नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकरण किया जाकर राशि छः करोड़ से अधिक के अवार्ड पारित किये गये। इसी प्रकार नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्रिलिटिगेशन के 1052 प्रकरणों का निराकरण किया गया जाकर 81 लाख से अधिक की वसूली की गई।
भतीजे ने चाचा-चाची के पैर छूकर लिया आशीर्वाद

दोनो के मध्य 7 वर्षो से चल रहे जमीनी विवाद का किया अंत
जिला मुख्यालय दमोह में वर्ष 2019 से स्वामित्व की उद्घोषणा एवं स्थायी निषेधाज्ञा का दावा चाचा देवेन्द्र कुमार जैन एवं चाची अंजना जैन के द्वारा प्रतिवादी/भतीजे योगेश कुमार जैन के विरूद्ध मौजा कुलुवा उर्फ मारूताल स्थित खं. नं. 1/70/1 रकवा 1.26 हेक्टेयर भूमि के संबंध में प्रस्तुत किया गया था। उक्त प्रकरण के कारण चाचा-भतीजे के मध्य आपसी संबंधों एवं रिश्तों में अत्यधिक खटास आ गई थी। रिश्तों में खटास के कारण कई घटना घटित हुई जिसके कारण दोनों पक्षों के मध्य दाण्डिक प्रकरण भी पंजीबद्ध हुये, सिविल प्रकरण में गवाही के प्रक्रम पर विद्वान न्यायाधीश दिव्या रामटेके चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश कनिष्क खण्ड दमोह द्वारा दोनों पक्षों को राजीनामा की समझाइश दी गई। न्यायालय की समझाइश एवं अधिवक्ता अभिषेक सिंघई के सहयोग से मामला आज लोक अदालत की खण्डपीठ क्रमांक 11 के समक्ष सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में राजीनामा के माध्यम से सुलझाया गया।
मौके पर जिला न्यायाधीश सुभाष सोलंकी, विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय मोहम्मद अजहर एवं दिव्या रामटेके की उपस्थिति में दोनों पक्षों को स्मृति स्वरूप फलदार पौधों का वितरण किया गया और भविष्य में विवाद ना करने की सलाह देते हुये पौधों का रोपण एवं उसकी देखभाल किये जाने की समझाइश दी गई। प्रकरण राजीनामा में समाप्त होने पर भतीजे योगेश जैन ने चाचा देवेन्द्र जैन एवं चाची अंजना के चरण स्पर्श किये, तो चाचा देवेन्द्र ने भतीजे योगेश को गले लगाकर अपनी जेब से 5000 रूपये दिये। तो न्यायालय का माहौल भावनात्मक बन गया। इस प्रकार लगभग 6 वर्षों से अधिक समय से चाचा-भतीजे के मध्य चल रहे विवाद का अन्त हुआ और दोनों पक्षों ने भविष्य में विवाद ना करने का प्रण लिया।
कुटुम्ब न्यायालय दमोह में निराकृत हुये 37 प्रकरण

कुटुम्ब न्यायालय दमोह से पति-पत्नि को समझाईश दिये जाने के बाद दोनों पक्ष साथ-साथ रहने को तैयार हुये और अपने प्रकरणों को राजीनामा के आधार पर निराकृत किया गया। ऐसे कुल 37 मामलो में पक्षकारों के द्वारा साथ रहने का निर्णय लिया गया और विवाद समाप्त किया गया। ऐसे 03 प्रकरणों में जो विवाद विच्छेद के लिए प्रस्तुत किये गये थे उन प्रकरणों में दम्पत्तियों के द्वारा अपना प्रकरण वापिस लिया जाकर न्यायालय से खुशी-खुशी साथ रहने हेतु विदा हुए। ऐसे दम्पत्तियों को प्रधान जिला न्यायाधीश दमोह व प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय दमोह के द्वारा ऐसे पक्षकारों को स्मृति के रूप में फलदार पौधे प्रदान किये गये एवं उनकी परवरिश करने हेतु कहा गया।
यह नेशनल लोक अदालत सभी न्यायाधीशों एवं सभी अभिभाषक बंधुओं, जिला प्रशासन, पत्रकार बंधुओं जिला न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त स्टॉफ के सहयोग से सम्पन्न हुई। जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चैरसिया ने सभी के सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश/प्रभारी अधिकारी नेशनल लोक अदालत उदय सिंह मरावी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय मोहम्मद अजहर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्नेहा सिंह, जिला मुख्यालय दमोह में पदस्थ समस्त न्यायाधीशगण, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ दमोह कमलेश भारद्वाज, उपाध्यक्ष सुरेश कुमार खत्री, अभियोजन अधिकारी कैलाश पटैल, नगर पुलिस अधीक्षक एच आर पाण्डे, जिला विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चैरसिया, जिला अभियंता (विद्युत) एमएल साहू, अध्यक्ष तृतीय श्रेणी न्यायिक कर्मचारी संघ दीपक सोनी, अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी न्यायिक कर्मचारी संघ विश्वनाथ बिल्थरे, अधिवक्तागण, अभियोजन अधिकारी, विद्युत विभाग, बैंक व नगरपालिका के अधिकारीगण व कर्मचारी और न्यायालयीन कर्मचारीगण मौजूद रहे।
