रायल्टी चुकता प्रमाण पत्र संबंधी फर्जी एनओसी तैयार कर कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग सतना एवं संविदाकार द्वारा धोखाधड़ी कर शासन को 02.00 करोड़ से अधिक राशि की आर्थिक क्षति पहुँचायी गई
रायल्टी चुकता प्रमाण पत्र जिसके आधार पर राशि का भुगतान किया गया है वह पत्र कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा रीवा से जारी होना नही पाया गया
सी.आर.एफ. योजना के अंतर्गत सतना जिले के विभिन्न सड़क निर्माण कार्यों में किया गया अनियमित भुगतान

भोपाल। सी.आर.एफ. योजना के अंतर्गत वर्ष 2017 से 2022 की अवधि में सतना जिले के सेमरिया बनकुइंया मार्ग से गाजन, मझियार, बकिया, लौलाछ, भटिगवां, खाम्हा, किचवरिया, इटौर, मैनपुरा, अकौना, टिकरी, खमरिया, गोरड्या मार्ग में 46.70 किमी. के सड़क निर्माण कार्य में लोक निर्माण विभाग सतना एवं संविदाकार मे० एस.आर. कन्स्ट्रक्शन दिल्ली द्वारा दिनांक 01.05.2017 को निष्पादित किये गये अनुबंध अनुसार कराये गये सड़क निर्माण कार्यो के अंतिम देयक का भुगतान दिनांक 27.07.2021 को किया गया।
निर्माण कार्य के चलित देयकों के भुगतान में माइल स्टोन (कार्य में विलम्ब) की राशि रुपये 2,59,66,580/- लोक निर्माण विभाग सतना द्वारा रोक ली गई थी। रोंकी गई राशि के भुगतान हेतु संविदाकार द्वारा लोक निर्माण विभाग सतना के कार्यालय में रायल्टी चुकता संबंधी कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा रीवा का पत्र प्रस्तुत किया गया। उक्त पत्र लगभग 08-09 माह बाद तत्कालीन कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग सतना श्री मनोज द्विवेदी द्वारा मार्क किया गया। उक्त पत्र लोक निर्माण विभाग सतना के कार्यालय में आवक होना नही पाया गया। उक्त पत्र के आधार पर तथा लोक निर्माण विभाग सतना के लेखाधिकारी की टीप को नजर अंदाज कर कार्यपालन यंत्री श्री मनोज द्विवेदी द्वारा संविदाकार को माइल स्टोन की रोकी गई राशि के भुगतान की अनुमति प्रदान की गई है।
कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा रीवा के जिस पत्र के आधार पर संविदाकार को माइल स्टोन की राशि का भुगतान किया गया है। उक्त पत्र कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा रीवा से जारी होना नही पाया गया है।
उक्त प्रकरण में लोक निर्माण विभाग सतना के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री श्री मनोज द्विवेदी, संविदाकार मे० एस.आर. कन्स्ट्रक्शन दिल्ली एवं अन्य संबंधित के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा में धारा 120बी, 409, 420, 467, 468, 471 भादवि, धारा 7 सी, 13(1)ए, 13(2) भ्रनिअ 1988 (संशोधन अधिनियम 2018) के अंतर्गत अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
