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दमोह। 36 वे स्वर्गीय ज्ञानचंद श्रीवास्तव स्मृति सम्मान समारोह समारोह पूर्वक आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र भारत सरकार के सेवानिवृत्ति उप महानिदेशक और चिंतक संजय सिंह थे कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर केदार शिवहरे ने की स्थानीय ज्ञानचंद श्रीवास्तव स्मृति महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का शुभारंभ दी प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के द्वारा किया गया सरस्वती वंदना पूर्वा वैद्य जयति श्रीवास्तव और नरेंद्र अरजरिया ने प्रस्तुत की मुख्य अतिथि के मान पत्र का वाचन सचिन गुरू ने किया आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथि सिन्हा का शाल श्रीफल एवं संमान पत्र द्वारा भावभीना सम्मान किया गया महाविद्यालय शिक्षा से सेवानिवृत्ति प्राध्यापक डॉक्टर पीएल जैन और डॉक्टर एमके जैन का ट्रस्ट द्वारा शाल श्रीफल एवं मान पत्र द्वारा सम्मान किया गया। मान पत्र का वाचन एडवोकेट रमेश शुक्ला एवं एडवोकेट दीपक श्रीवास्तव द्वारा किया गया। ट्रस्ट का प्रतिवेदन न्यास के मंत्री पंकज हर्ष ने श्रीवास्तव ने प्रस्तुत किया ज्ञान साहब का परिचय पूर्व विधायक अजय टंडन ने प्रस्तुत करते हुए उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व की संज्ञा दी। दमोह जिले के स्वतंत्रता संग्राम के बारे में डॉक्टर एनआर राठौर ने अपनी बात रखी कार्यक्रम में 11 से अधिक प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को रजत पदक एवं प्रशस्ति पत्र से  पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम में स्वर्गीय डॉक्टर छविनाथ तिवारी द्वारा रचित कृति आत्मजेता चिंतन से चौतन्य की यात्रा का विमोचन भी किया गया। इसका संपादन कुमारी प्राची तिवारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सचिन सिन्हा ने कार्यक्रम के आयोजन की भूरी भूरी सराहना की और कहा की ज्ञान साहब के व्यक्तित्व से हम सब प्रेरणा ग्रहण करते हैं युगो युगो से महान पुरुष धरा में अवतरित होते हैं उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में सेनानी के रूप में अनूठा कार्य कर समाज को प्रेरणा दी यह उनके अनूठे संकल्प का प्रतीक है। वह आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा के गुणों को आत्मसात करते थे यही कारण है आजादी की लड़ाई में ज्ञान बाबू का उल्लेखनीय योगदान रहा है। हमें अपना अपना करने की बजाय समाज के लिए कष्ट सहते हुए कार्य करने की प्रेरणा महापुरुषों से ही मिलती है। मैं पुरूस्कृत विद्यार्थियों से आग्रह करूंगा कि वह अपनी सामर्थ, प्रतिभा और समय का नियोजन समाज के हित में करें तभी हम एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

मनुष्य जीवन के चार सूत्र अपने जीवन को बदल सकते हैं यह है समझदारी, जिम्मेदारी, ईमानदारी और बहादुरी। सारे विश्व में विवेक बुद्धि केवल मनुष्य को प्राप्त है बड़े भाग मानुष तन पाबा, सुर दुर्लभ ग्रंथ सब गाव। हमें सबसे पहले स्वयं के प्रति ईमानदार होना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए उपस्थित सोताओं को रोमांचित कर दिया और कहा कि हमारी सबसे बड़ी लड़ाई हमारी नकारत्मक सोच से है। जब हम अपने मन को निर्मल बनाएंगे तभी पूजा और साधना का उद्देश्य पूरा होगा। हमें अपने जीवन में त्याग, समर्पण और संस्कार परंपरा को आगे बढ़ाना है। डॉक्टर केदार शिवहरे ने अध्यक्षीय उद्बोधन में युवा पीढ़ी को प्रेरित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन राजीव अयाची और डॉक्टर आलोक सोनवलकर ने किया। आभार प्रदर्शन पंकज हर्ष श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के द्वारा किया गया।

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