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फर्जी हनीट्रेप मामले से व्यापारी को डरा 65 लाख की वसूली करने वाले पुलिस अधिकारी दंडित
इन्दौर । पुलिस कमिश्नर ने टीआई और एएसआई को फर्जी हनी ट्रैप मामले मे एक व्यापारी को धमका उससे 65 लाख वसूली के मामले में दंडित करते हुए नियत समयावधि हेतु सब इंस्पेक्टर और सिपाही बना दिया है। इन दोनों ने एक ब्लैकमेलर महिला की झूठी शिकायत पर अनूप नगर निवासी व्यापारी रवी को हनी ट्रैप के मामले में फंसाने की धमकी देकर 65 लाख रुपए की अवैध वसूली की थी। इस मामले में पहले ही एक सिपाही गोविंद द्विवेदी को बर्खास्त किया जा चुका है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, एमआईजी थाने में टीआई रहे अजय वर्मा और एएसआई धीरज शर्मा के खिलाफ जांच में दोषी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। फर्जी हनीट्रेप मामले में फंसाकर व्यापारी से टी आई और एएसआई द्वारा लाखों रूपए की वसूली का यह मामला इस प्रकार है कि 3 मार्च 2022 को एक महिला का आवेदन आरक्षक गोविंद द्विवेदी (अब बर्खास्त) ने एमआईजी थाने के प्रधान आरक्षक संजय चौहान को देते हुए कहा कि ये आवेदन एएसआई धीरज शर्मा को मार्क कर देना। टीआई साहब से बात हो गई है। आवेदन पर टीआई अजय वर्मा और एएसआई धीरज शर्मा ने बिना कानूनी कार्रवाई करते हुए सीधे कारोबारी को थाने बुला धमकाया कि महिला दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करा देगी तो तुम फंस जाओगे। यदि यहीं लेनदेन हो गया तो महिला राजीनामा कर लेगी। डरकर व्यापारी ने रुपए दे दिए। इसके बाद उसके खिलाफ न तो जांच की गई और न ही केस दर्ज किया गया। कुछ दिन बाद शिकायत मिलने पर मामले में तत्कालीन एसीपी भूपेंद्र सिंह ने जांच की। इसमें महिला की फर्जी शिकायत, टीआई, एएसआई और सिपाही की भूमिका पाई गई। वहीं महिला द्वारा दिया आवेदन भी गोविंद द्वारा ही तैयार करना पाया गया। मामले का खुलासा होने के बाद लगातार जांच होती रही। इसमें जोन-1 के डीसीपी की जांच में पता चला कि टीआई थाने में समानांतर सत्ता चला रहे थे। वहीं इस मामले में महिला के आवेदन की आड़ में व्यापारी से दो लाख रु. महीना भी वसूल रहे थे। जांच में टीआई, एएसआई व सिपाही की कॉल डिटेल भी महिला के फोन से मिली । जांच में यह बात भी सामने आई कि व्यापारी के एक परिचित दलाल ने ही महिला से उसका परिचय कराया था और वे महिला को घुमाने के लिए फ्लाइट से बेंगलुरु ले गया था। इसके बाद महिला ने व्यापारी को धमकाकर फ्लैट, फर्नीचर, घरेलू सामान लिया था तथा बुटिक भी खुलवाया और बाद में थाने में आवेदन दे दिया। कोराबारी ने तब भी उसे 30 लाख रुपए से ज्यादा दिए थे। मामला उजागर होने के बाद टी आई अजय वर्मा का तबादला उज्जैन कर पहले एडिशनल डीसीपी स्तर पर जांच की गई, जिसमें आरक्षक गोविंद द्विवेदी को बर्खास्त किया गया। इसके बाद टीआई अजय वर्मा और धीरज शर्मा के खिलाफ जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध पाई जाने पर कल एक आदेश जारी कर टीआई अजय वर्मा को दो साल के लिए उपनिरीक्षक और धीरज शर्मा को पांच साल के लिए आरक्षक बना दंडित किया गया।

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