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पंचायत चुनाव के दौरान जमीनी विवाद के चलते छोटे भाई को गोली चला दी थी

दमोह। पंचायत चुनाव के दौरान जमीनी विवाद के चलते छोटे भाई को गोली मारने के मामले में न्यायालय ने बड़े भाई को दोषी करार देते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार वर्मा की अदालत ने आरोपी रमेश पटेल को भादवि की धारा 307 के अंतर्गत 8 वर्ष, आयुध अधिनियम की धारा 27 के तहत 7 वर्ष तथा धारा 25 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 1800 रुपये का अर्थदंड भी आरोपित किया है। मामले में मध्यप्रदेश शासन की ओर से प्रभावी पैरवी शासकीय अधिवक्ता राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई। अभियोजन के अनुसार, घटना दिनांक 24 जून 2022 की है। थाना दमोह देहात अंतर्गत ग्राम सरखड़ी निवासी संतोष पटेल, जो दिल्ली में निवास करता था, पंचायत चुनाव में मतदान करने के लिए दिल्ली से दमोह आया था।

वह सुबह करीब 10:30 बजे अपने गांव सरखड़ी पहुंचकर मनोहर पटेल की किराना दुकान से बीड़ी खरीद रहा था। इसी दौरान उसका बड़ा भाई रमेश पटेल वहां पहुंचा, जिसके साथ उसका लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा था। आरोपी ने संतोष से कहा कि “तू फिर दिल्ली से आ गया है, आज तुझे जान से खत्म कर दूंगा” और कमर के पीछे से बंदूक निकालकर उसके सीने पर गोली चला दी। गोली लगने से संतोष गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों की सहायता से घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी जान बच सकी। घटना की रिपोर्ट थाना दमोह देहात में दर्ज की गई। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा 11 साक्षियों के बयान कराए गए। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पंचायत चुनाव के दौरान किसी अन्य व्यक्ति से विवाद के कारण संतोष को चोट लगी थी और आरोपी को झूठा फंसाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि घायल के शरीर से गोली या छर्रे जब्त नहीं किए गए, इसलिए धारा 307 लागू नहीं होती। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि धारा 307 के अंतर्गत यह आवश्यक नहीं है कि आहत को गंभीर चोट पहुंचे, बल्कि जान से मारने की नीयत से किया गया हमला ही इस धारा को आकर्षित करता है। न्यायालय ने बचाव पक्ष के सभी तर्कों को निराधार मानते हुए आरोपी रमेश पटेल को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

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