
लघु कथाकार ओजेंद्र तिवारी सम्मानित हुए
मन का खालीपन भर जाए, ऐसा कोई गीत सुना साथी – मधु पाराशर
दमोह। मध्य प्रदेश लेखक संघ दमोह के तत्वाधान में गतदिवस एक साहित्य कार्यक्रम महारानी लक्ष्मीबाई कन्या शाला दमोह के सभा कक्ष में संपन्न हुआ। जिसमें ओजेंद्र तिवारी के ’व्यक्तित्व और कृतित्व’ पर चर्चा करते हुए मुख्य अतिथि डॉ एन.आर. राठौर ने कहा की तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद तिवारी का कथा संसार लघु कथा के रूप में निरंतर परिष्कृत होता जा रहा है और आज उनकी ख्याति एक अंतरराष्ट्रीय लघु कथाकार के रूप में जानी जा रही है जो दमोह के लिए गौरव की बात है। आम आदमी की झोपड़पट्टी से लेकर आलीशान कंक्रीट के जंगलों में प्रवेश करना आजेंद्र तिवारी जैसे संवेदनशील लेखकों के ही सामर्थ की बात है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ रघुनंदन चिले ने कहा कि लघु कथा का अपना एक शिल्प है सीमित शब्दों में जिसका भेदन अदभुद होता है। इस विधा में ओजेंद्र तिवारी निष्णांत कथाकार हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं प्रमुख वक्ता डॉ पी एल शर्मा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि ओजेंद्र तिवारी का कृतत्व उपलब्धियां से भरा हुआ एक समृद्ध संसार है। व्यक्ति के रूप में वह एक मृदुभाषी और विनम्र व्यक्ति है, साथ ही शासकीय सेवक के रूप में उनकी शिक्षकीय कर्तव्य निष्ठा को लोग आज भी याद करते हैं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्था अध्यक्ष इंजी अमर सिंह राजपूत ने कहा कि ओजेंद्र तिवारी पर पुत्रशोक का एक ऐसा बड़ा प्रहार हुआ था जिसे झेल पाना संभव नहीं हो पाता परंतु अपनी उस व्यथा को उन्होंने कलम की धार बनाकर अपनी कहानियों में तिरोहित कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया।
अभिनंदन पत्र का वाचन करते हुए संस्था के सचिव पीएस परिहर ने कहा भाई ओजेंद्र तिवारी सबके अजीज हैं उन्हें अपना मित्र पाकर मुझे गर्व महसूस होता है। शाल श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया तदुपरांत अपने संक्षिप्त उद्बोधन में ओजेंद्र तिवारी ने कहा कि मैंने यहां से जो प्राप्त किया है ,अपने लेखन के माध्यम से उसे लौटने का प्रयास किया है जिसे लेखक समाज ने स्वीकार किया यह मेरा सौभाग्य है। द्वितीय सत्र में कवि वृंदों ने अपने-अपने काव्य सुमन अर्पित किए। मधु पाराशर ने अपनी रचना पड़ी की ,मन का खालीपन भर जाए, ऐसा कोई गीत सुना साथी। चंद्रा नेमा ने, जब कोई राह भटक जाए, तब दुखियारे नयन छलक जाएं। बी एम दुबे ने, विवाहित लोगों को, और नव युवकों को देता हूं सलाह। बबीता चैबे शक्ति ने, सजन जइयो दमोह के बजार, हमाय मन को ले अईओ। डॉ रघुनंदन चिले ने, आदमी को आदमी बनाओ तो कोई बात हो। पी एस परिहार मुख्लिश दमोही ने, जिसको मेरी निगाह में समझा कुछ और है। रमेश तिवारी ने, पहले कोई, कोई बाद में, उलझे हैं सब इसी बाद में। आराधना राय ने, मेरी आवाज को बुलंद होने दो, पद्मा तिवारी ने, शुभ दिवस है आज आपका, बधाई करें स्वीकार। वसुंधरा तिवारी ने, हम संघर्षों के दायरे में जिये जा रहे। आनंद जैन ने, मैं भूलना चाहता हूं, मगर भूल जाता हूं। प्रेमलता उपाध्याय ने, पढ़ें हिंदी, लिखें हिंदी, पटल निर्देश ये हिंदी। संगीता पांडे ने, शाम ढलने के लिए रोज सुबह सजते हैं। कमलेश शुक्ला ने, शिव सा गरल का पान है करती, फिर भी पुरुष के सामने उसकी क्या हस्ती।ष्रचना पढ़ी। इसी तरह रामकुमार तिवारी, मानव बजाज, राजेश शर्मा, शैलेंद्र वर्मा, बृजभूषण शर्मा, हरिश्चंद्र सोनी, भावना शिवहरे, मनोहर काजल, गणेश राय, रवि शाह ,और लता गुरु ने भी अपनी अपनी रचनाएं पढ़ी अंत में इंजी अमर सिंह राजपूत ने रचना पढ़ी की थर-थर कांपे यामिनी, दूर कुहिर की रात। इसी के साथ स्कूल संस्था को एक दीवाल घड़ी भेंट कर उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। कार्यक्रम में वैभव तिवारी एवं शैलेंद्र ठाकुर की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में डॉ आलोक सोनवलकर ने सभी का आभार प्रकट किया।
