Spread the love

सीबीआई कार्रवाई की मांग वाली याचिका खारिज
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को आखिरकार उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें लवासा प्रकरण में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार परिवार के खिलाफ कार्रवाई का आदेश मांगा गया था। कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस मामले पर सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह फैसला सुरक्षित रखते हुए, उसने याचिका खारिज होने का इशारा दिया था, यह बताते हुए कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि उनकी मांग क़ानूनी है। दरअसल इस केस में ओरिजिनल पिटीशनर नानासाहेब जाधव ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका फाइल की थी। याचिकामें शरद पवार, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले के साथ-साथ पवार परिवार के करीबी अजित गुलाबचंद का नाम भी शामिल था और मांग की गई थी कि सीबीआई को सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया जाए। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायाधीश गौतम अंखड की बेंच के सामने सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश ने बीते मंगलवार की सुनवाई के बाद यह भी साफ किया था कि याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद, हमें इस याचिका में दखल देने वाले याचिकाकर्ता को सुनना या याचिकाकर्ता को अपनी याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देना ज़रूरी नहीं लगता।

क्या है याचिका ?
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने 26 फरवरी, 2022 को लवासा प्रोजेक्ट के खिलाफ याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि पुणे जिले में लवासा हिल स्टेशन प्रोजेक्ट के बारे में याचिकाकर्ता के आरोप सैद्धांतिक रूप से सही हैं, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती देने में बहुत देर कर दी है। अगर लवासा प्रोजेक्ट के बारे में लगाए गए आरोप सही भी हैं, तो भी कानून में किए गए बदलावों को गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता। याचिकाकर्ता के आरोपों के मुताबिक, यह साफ है कि इस मामले में शरद पवार और सुप्रिया सुले लवासा प्रोजेक्ट में दिलचस्पी रखते थे। ऐसा लगता है कि उस समय के जल संसाधन मंत्री अजीत पवार ने कृष्णा नदी बेसिन में जमीन ट्रांसफर करते समय गड़बड़ी की थी। इस प्रोजेक्ट के लिए सही टेंडर प्रक्रिया करना ज़रूरी था। हालांकि, बेंच ने फैसले में साफ किया था कि यह भी बताया गया था कि कोई टेंडर प्रक्रिया लागू नहीं किया गया था। लेकिन उसी फैसले के कुछ नतीजों के आधार पर, इस नई याचिका में मांग की गई कि सीबीआई को लवासा केस मामले में शरद पवार, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और सांसद सुप्रिया सुले तथा इस केस से जुड़े सरकारी अधिकारियों, के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दे।

याचिका में में मुख्य आरोप
कैग और लोकायुक्त ने भी लवासा केस में दी गई रिपोर्ट को नजरअंदाज किया है, और लोकायुक्त की फाइल की गई रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि इस प्रोजेक्ट से सरकारी खजाने को 5 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साल 2018 में पुणे के पुलिस कमिश्नर को की गई शिकायत को आयुक्त ने पौंड पुलिस को फॉरवर्ड कर दिया था। पौंड पुलिस ने यह शिकायत फिर से पुलिस आयुक्त को फॉरवर्ड कर दी। साल 2019 में पुलिस आयुक्त ने यह शिकायत पुणे ग्रामीण के पुलिस उपायुक्त को ट्रांसफर कर दी। आरटीआई से पता चला कि पौंड पुलिस ने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, इसलिए मई 2022 में पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई गई। लेकिन, उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर, याचिकाकर्ता जाधव ने अपनी याचिका में बताया था कि उन्होंने आखिरकार यह पीआईएल फाइल की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *