
बिना रिश्वत दिए लाइसेंस की फाइल आगे नहीं बढ़ती और कार्रवाई का डर दिखाकर बनाया जाता है मानसिक दबाव
जबलपुर। शहर में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एफएसएसएआई लाइसेंस जारी करने के नाम पर व्यापारियों से कथित अवैध वसूली, जांच के दौरान दबाव बनाने और निजी कर्मचारियों के माध्यम से काम कराने के आरोप सामने आने के बाद व्यापारी संगठनों में भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि बिना रिश्वत दिए लाइसेंस की फाइल आगे नहीं बढ़ती और कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाया जाता है।
एक व्यवसायी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि उनकी कंपनी द्वारा खाद्य उत्पादन इकाई के लिए एफएसएसएआई फूड लाइसेंस का आवेदन किया गया था। आवेदन के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों देवेन्द्र दुबे, संजय गुप्ता और उनके साथ पहुंचे निजी कर्मचारियों द्वारा फैक्ट्री का निरीक्षण किया गया। व्यापारी का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान छोटी-छोटी कमियों को बड़ा मुद्दा बनाकर लाइसेंस प्रक्रिया को रोकने का माहौल तैयार किया गया।
व्यवसायी के अनुसार निरीक्षण के बाद उनसे साफ तौर पर कहा गया कि यदि लाइसेंस जल्दी और बिना परेशानी के चाहिए तो 20 हजार रुपये देने होंगे। व्यापारी का दावा है कि बिना राशि दिए फाइल आगे नहीं बढ़ाने के संकेत दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह पूरे मामले के प्रमाण प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत करेंगे।
जांच या दबाव….
व्यापारियों का आरोप है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच कार्रवाई अब नियमों से ज्यादा दबाव का माध्यम बनती जा रही है। होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी, बेकरी और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान मामूली कमियों को गंभीर उल्लंघन बताकर कार्रवाई का डर दिखाया जाता है।
मिष्ठान विक्रेता संघ मर्यादित जबलपुर के हेमराज अग्रवाल और देवेश गुप्ता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारी जांच के नाम पर व्यापारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। उनका कहना है कि यदि कोई व्यापारी कथित रूप से पैसे देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की धमकी दी जाती है। इससे व्यापारियों में भय और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है।
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों के साथ निजी व्यक्ति और कथित कर्मचारी भी पहुंचते हैं, जो स्वयं को विभागीय टीम का हिस्सा बताते हैं। ये लोग दस्तावेजों की जांच और पूछताछ में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जबकि उनके पास कोई अधिकृत पहचान पत्र नहीं होता। व्यापारियों का कहना है कि किसी भी सरकारी जांच में केवल अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी ही शामिल हो सकते हैं, ऐसे में निजी लोगों की मौजूदगी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मुख्यमंत्री से की शिकायत…
मिष्ठान विक्रेता संघ मर्यादित जबलपुर के पदाधिकारियों हेमराज अग्रवाल और देवेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायत भेजी है। शिकायत में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों देवेन्द्र दुबे और संजय गुप्ता की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
संघ ने मांग की है कि विभागीय कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से हो और व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। साथ ही कथित अवैध वसूली और निजी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर ने बनाई जांच टीम …
खाद्य विभाग के अधिकारियों पर लगे आरोपों के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर द्वारा मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। अब व्यापारियों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि जांच के नाम पर इसी तरह भय और दबाव का माहौल बनाया गया, तो व्यापारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब और चेहरे होंगे बेनकाब!……..
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अब शहरभर में चर्चा तेज हो गई है। कई व्यापारियों का कहना है कि वे लंबे समय से कथित अवैध वसूली और दबाव की स्थिति का सामना कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के डर से खुलकर सामने नहीं आ पा रहे थे।
अब शिकायत सामने आने के बाद कई अन्य व्यापारी भी अपने अनुभव सार्वजनिक करने और प्रशासन को प्रमाण सौंपने की तैयारी में हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो विभाग से जुड़े कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, उनकी आय और संपत्ति की भी जांच हो और खाद्य सुरक्षा विभाग की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि व्यापारी बिना भय के अपना व्यवसाय संचालित कर सकें।
