कृषि संकाय शुरू होने की घोषणा से क्षेत्र में उत्साह

दमोह :पंडित माधवराव सप्रे जी ने न केवल हिंदी भाषा को नई दिशा दी, बल्कि अन्य भाषाओं में भी अपनी विद्वता का परचम लहराया। कई साहित्यिक मंचों पर यह उल्लेख मिलता है कि हिंदी वाचन और अनुवाद कार्यों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका अधिकांश जीवनकाल रायपुर में बीता, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राजधानी है, जबकि उनका जन्म एवं प्रारंभिक जीवन पथरिया की धरती पर बीता, जो क्षेत्रवासियों के लिए गर्व का विषय है। उनके सम्मान में ही कॉलेज का नाम पंडित माधवराव सप्रे के नाम पर रखा गया, इस आशय की बात प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने हिंदी साहित्य के महान पुरोधा एवं क्षेत्र के गौरव पंडित माधवराव सप्रे का 155वां जन्मदिवस के अवसर पर पथरिया में माधवराव सप्रे शासकीय महाविद्यालय में आयोजित गरियामय कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में सप्रे जी के हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें हिंदी जागरण का अग्रदूत बताया।
पथरिया सहित जिले के पांच संस्थानों में कृषि संकाय प्रारंभ

राज्यमंत्री श्री पटेल ने क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही कृषि संकाय की मांग पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होने कहा कि पूर्व में कृषि संकाय केवल दमोह और हटा में संचालित था, लेकिन अब जिले में पांच स्थानों पर कृषि संकाय प्रारंभ करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं, इन संस्थानों में पथरिया, तेंदूखेड़ा, दमोह तथा हटा के विद्यालयों में कक्षा 11वीं एवं 12वीं स्तर पर कृषि संकाय शुरू किया जाएगा। नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा का लाभ मिलना प्रारंभ हो जाएगा।कृषि संकाय प्रारंभ होने की घोषणा से विद्यार्थियों, अभिभावकों और क्षेत्रवासियों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे ग्रामीण एवं कृषि आधारित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शिक्षा और रोजगारोन्मुखी अवसर प्राप्त होंगे।
