
आयोग अभी रिपोर्ट देने को नहीं तैयार
नई दिल्ली। करीब 70 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों पर टिकी हैं। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हो चुका है, लेकिन अभी तक उसने अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि संशोधित वेतन, भत्तों और पेंशन की रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। इसके साथ ही नई वेतन-पेंशन व्यवस्था लागू होने की तारीख भी घोषित नहीं की गई है।वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अभी अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर पाया है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को वेतन, महंगाई भत्ता (डीए), अन्य भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में संभावित बदलाव के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
सरकार के मुताबिक, आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं। इस हिसाब से रिपोर्ट पेश करने की अंतिम समय-सीमा मई 2027 तक है। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि आयोग की सिफारिशें लागू कब से होंगी। यही वजह है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच संशोधित वेतन और पेंशन की प्रभावी तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है।
8वें वेतन आयोग के दायरे में करीब 35.77 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 33.76 लाख पेंशनर्स आते हैं। रक्षा पेंशनभोगियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
पेंशनभोगी संगठन आयोग के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं। इनमें महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीआर) में हर तीन महीने पर संशोधन की मांग प्रमुख है। मौजूदा व्यवस्था में डीए और डीआर में साल में दो बार बदलाव होता है। मांग है कि बढ़ती महंगाई के असर को देखते हुए तिमाही आधार पर संशोधन किया जाए। इसके अलावा डीआर 25 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे मूल पेंशन में शामिल करने की मांग भी की गई है। पेंशनभोगी संगठनों ने न्यूनतम पेंशन 45 हजार रुपये और न्यूनतम मूल वेतन 69 हजार रुपये करने तथा 3.83 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। साथ ही वेतन और पेंशन की समीक्षा 10 साल के बजाय हर पांच साल में करने की मांग भी सामने आई है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को लंबे समय तक संशोधन का इंतजार न करना पड़े।
