
नई दिल्ली । मद्रास हाई कोर्ट ने हिंदू संयुक्त परिवार की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विधवा मां की दूसरी शादी होने मात्र से उसकी बेटी का मृत पिता की संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में अधिकार खत्म नहीं हो जाता। आदेश में जस्टिस पीबी बालाजी ने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के तहत दूसरी शादी के कारण पैदा होने वाली अयोग्यता विधवा तक सीमित रहती है। इसका असर मृत पति के दूसरे कानूनी वारिसों के अधिकार पर नहीं पड़ता।
मामला एक मृत कोपार्सनर वेंकटेशन की संपत्ति से जुड़ा था। उनकी मृत्यु के बाद उनकी विधवा ने दूसरी शादी कर ली थी और उन्होंने पति की संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं लिया। दंपती की इकलौती बेटी, जो क्लास वन की कानूनी वारिस थी, ने पिता का हिस्सा विरासत में प्राप्त किया। बाद में बेटी ने संपत्ति के कुछ हिस्सों में थर्ड-पार्टी अधिकार भी बनाए। इसी दौरान वेंकटेशन के एक रिश्तेदार ने उसके संपत्ति अधिकार को चुनौती दे दी। रिश्तेदार की ओर से तर्क दिया गया कि चूंकि वेंकटेशन की विधवा ने 2005 के संशोधन से पहले ही दूसरी शादी कर ली थी, इसलिए उस समय लागू हिंदू सक्सेशन एक्ट की धारा 24 के तहत उसका उत्तराधिकार अधिकार खत्म हो गया था। दलील यह भी दी गई कि विधवा के अयोग्य होने के बाद वेंकटेशन का हिस्सा दूसरे कोपार्सनरों को वापस मिलना चाहिए और उनके हिस्से बढऩे चाहिए। हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने धारा 24 की व्याख्या की…..
कोर्ट ने पुराने सेक्शन 24 की व्याख्या करते हुए कहा कि दूसरी शादी करने वाली विधवा को उत्तराधिकार से अयोग्य ठहराने का प्रावधान विधवा के अपने उत्तराधिकार अधिकार तक सीमित था। इससे मृत पति का कोपार्सनरी इंटरेस्ट समाप्त नहीं होता था। कोर्ट के मुताबिक मृतक का हिस्सा उसके अन्य योग्य ढ्ढ वारिसों को मिलने के लिए उपलब्ध रहता है। इसमें उसकी मां और बच्चे भी शामिल हो सकते हैं।
बेटी को मिला पिता का पूरा हिस्सा……
इस मामले में वेंकटेशन की इकलौती बेटी उनकी क्लास वन कानूनी वारिस थी। इसलिए कोर्ट ने माना कि विधवा की दूसरी शादी के कारण बेटी का स्वतंत्र उत्तराधिकार अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मां की अयोग्यता को आधार बनाकर बेटी के विरासत के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता। चूंकि विधवा ने खुद संपत्ति में कोई दावा नहीं किया था, इसलिए मृतक का हिस्सा उसकी योग्य बेटी को विरासत में मिलना था।
