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बर्लिन । करीबी 110 साल पहले समुद्र में डूबी जर्मन पनडुब्बी जहरीला टाइम बम बन चुकी है। यह पनडुब्बी अब समुद्री पर्यावरण के लिए खतरा बनती जा रही है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान यह जर्मन पनडुब्बी समुद्र में डूब गई थी। नॉर्थ सी में मौजूद इस पनडुब्बी के मलबे से टीएनटी जैसे विस्फोटक पदार्थ के रिसाव का पता चला है। वैज्ञानिकों ने पानी, समुद्री तल और वहां रहने वाले जीवों के नमूनों की जांच में टीएनटी के अंश पाए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जिस धातु के ढांचे में विस्फोटक बंद हैं, वह समुद्री पानी के कारण धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। ऐसे में आने वाले समय में रिसाव बढ़ने की आशंका है।
यह मामला जर्मनी की यूसी-30 पनडुब्बी से जुड़ा है। 19 अप्रैल 1917 को इंजन में खराबी के बाद लौट रही यह पनडुब्बी डेनमार्क के रोमो द्वीप के पास एक ब्रिटिश बारूदी सुरंग से टकराकर समुद्र में समा गई थी। हादसे में पनडुब्बी के सभी 27 क्रू सदस्यों की मौत हो गई थी। करीब एक सदी तक इसका मलबा समुद्र में लापता रहा और वर्ष 2016 में इसे खोजा गया। नॉर्थ सी रेक्स परियोजना के तहत शोधकर्ताओं ने इस मलबे के आसपास पानी, समुद्री तल की मिट्टी और समुद्री जीवों के नमूने एकत्र किए। जांच में टीएनटी के अंश मिलने के बाद वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। आरहुस यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक कैटरीन जूल एंड्रेसन के मुताबिक, विस्फोटक के अवशेष समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में फैल रहे हैं। पानी में मौजूद रसायन समुद्री जीवों तक पहुंचने से पर्यावरण पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पनडुब्बी के भीतर छह टॉरपीडो और 18 माइंस मौजूद होने की जानकारी है। समुद्री पानी के लगातार संपर्क में रहने से मलबे का धातु ढांचा धीरे-धीरे जंग खा रहा है। इससे भविष्य में इन हथियारों से रसायनों के रिसाव का खतरा बढ़ सकता है। समुद्री जीवों के ऊतकों में टीएनटी के अंश मिलना इस खतरे की गंभीरता को दिखाता है। यह समस्या केवल एक पनडुब्बी तक सीमित नहीं है।
डेनमार्क के समुद्री क्षेत्र में करीब 10,127 डूबे हुए जहाजों के मलबे मौजूद होने का दावा किया गया है। इनमें लगभग 15 प्रतिशत मलबा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौर का है। इन जहाजों में बड़ी मात्रा में बिना फटे हथियार और विस्फोटक दबे होने की आशंका है। इन मलबों को समुद्र से निकालना आसान नहीं है। किसी पुराने हथियार या विस्फोटक को छेड़ने से दुर्घटना हो सकती है और समुद्र में मौजूद जहरीले पदार्थ और तेजी से फैल सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अब रोबोट और दूर से संचालित तकनीक की मदद से ऐसे विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से हटाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

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