निर्माण कार्यों के बिल पास करने के ऐवज में मांगी गई थी रिश्वत
दमोह। न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दमोह श्री संतोष कुमार गुप्ता ने रिश्वतखोर सहायक यंत्री को न्यायालय ने सुनाई 4 साल की कठोर कैद की सजा से दण्डित किया है।निर्माण कार्यों के बिल पास करने के ऐवज में रिश्वत मांगी गई थी ।
अभियोजन के मुताबिक फरियादी लीलेन्द्र सिंह लोधी द्वारा दिनांक 13/10/2021 को लोकायुक्त पुलिस सागर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उनकी माता श्रीमति मूंगाबाई (तत्कालीन सरपंच, ग्राम पंचायत बालाकोट) के कार्यकाल के दौरान मनरेगा योजनांतर्गत कराए गए निर्माण कार्यों (नवीन तालाब, खकरी निर्माण, वृक्षारोपण आदि) के लगभग 70-80 लाख के देयकों/बिलों के भुगतान की अनुशंसा करने के एवज में आरोपी गोविंद दास अहिरवार द्वारा 5 प्रतिशत (50,000/-) रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन उपरांत दिनांक 01.11.2021 को ट्रैप कार्यवाही के दौरान आरोपी गोविंद दास अहिरवार को जनपद पंचायत कार्यालय दमोह परिसर में 50,000/- की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के कब्जे/पेंट की दाहिनी जेब से रिश्वती नोट बरामद किए गए तथा हाथ एवं कपड़ों की धुलाई के केमिकल परीक्षण में घोल का रंग गुलाबी पाया गया था।
विवेचना में संकलित भौतिक, मौखिक, इलेक्ट्रॉनिक एवं FSL (रसायनिक व ध्वनि परीक्षण) रिपोर्ट अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में पेश किया गया।
*’मैं तो मौके पर था ही नहीं’— यंत्री के ‘अन्यत्र उपस्थिति’ (Plea of Alibi) के झूठे दावों की खुली पोल: आरोपी द्वारा न्यायालय में यह बचाव (Plea of Alibi) लेने की कोशिश की गई कि वह घटना समय पर मौके पर मौजूद ही नहीं था। परंतु निष्पक्ष पंचसाक्षियों की गवाही, नक्शा-मौका, रंगे हाथों जब्ती तथा केमिकल परीक्षण (FSL) की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने आरोपी के इस झूठे दावे को खारिज कर दिया*|
मामले में दस्तावेजी साक्ष्य, मौखिक साक्ष्य व अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्को से सहमत होकर न्यायालय द्वारा पारित निर्णय में आरोपी गोविंददास अहिरवार कोआरोपी गोविंद दास अहिरवार (तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री, जनपद पंचायत दमोह) को दोषसिद्ध पाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन -2018) की धारा 07 एवं धारा 13(1)(b) सहपठित धारा 13(2) में दोषसिद्ध करते हुए 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000/- अर्थदंड से दंडित किया गया।
अभियोजन की ओर से पैरवी प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन श्री धर्मेन्द्र सिंह तारन के निर्देशन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री संजय कुमार रावत द्वारा की गई एवं श्री विनय नामदेव द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया।

