
इंदौर। म०प्र० उच्च माननीय मुख्य न्यायाधिपति सुरेश कुमार कैत साहब, न्यायालय जबलपुर, माननीय प्रशासनिक न्यायाधिपति विवेक रूसिया, म०प्र० उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर एवं माननीय न्यायाधिपति विजय कुमार शुक्ला साहब, म०प्र० उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर की गरिमामयी उपस्थिति में म.प्र. न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर के कान्फ्रेंस हॉल में आज दिनांक 12/12/2024 को सायं सफल आयोजन 4:00 बजे बजे सामुदायिक मध्यस्थों हेतु कौशल संवर्धन कार्यक्रम का किया गया I
माननीय न्यायाधिपति विवेक रूसिया साहब द्वारा स्वागत भाषण के दौरान का पहला प्रयोग जबलपुर, भोपाल व्यक्त किया गया कि सामुदायिक मध्यस्थता ग्वालियर में किया गया परंतु वहां सफल नहीं हो पाया, जब उन्होंने उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में मीडिएशन कमेटी का चेयरमैन का पद धारण किया तो उन्होंने यहां इसका प्रयोग किया। जब इसका पहला सेशन सात दिन का हुआ तो लोग संकोच कर रहे थे परंतु एक-दो दिन जब आये तो उनके द्वारा अपने-अपने प्रोग्राम कैंसिल करके सातों दिन उपस्थित हुए एवं जो रुचि दिखाई उसका नतीजा हमारे सामने है । उन्होंने बताया कि सिविल उनके द्वारा इसका श्रेय सभी मध्यस्थगण को दिया गया के झगड़े खत्म करने हेतु रेवेन्यू आफिसर को प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु मास्टर ट्रेनर्स नीना खरे एवं डॉ. मो. शमीम साहब को दायित्व सौंपा गया साथ ही क्रिमिनल के प्रकरणों में समझौता हेतु पुलिस थाने में मध्यस्थता संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। मुख्य न्यायाधिति द्वारा स्वागत भाषण के दौरान व्यक्त किया ।
उन्होंने बताया कि उनकी पृष्ठभूमि गांव से है, अनुभव साझा किए गए उनके द्वारा पंचायत में भी भाग लिया गया है, पंचायत में ज्यादातर फैसले उनके पक्ष में होते हैं, जिस जाति की संख्या ज्यादा होती है, उन्होंने बताया कि एक बार पंचायत में वे फैसले के लिए बैठे थे तो दो जाति के व्यक्ति आए, एक नीची जाति और एक ऊँची जाति का ऊंची जाति वाले नीची जाति वाले को व्यक्ति को थप्पड मारा था सरपंच ने फैसला सुनाते हुए कहा नीची जाति वाले व्यक्ति को कहा कि झगड़ा मत करना तो उनके द्वारा सोचा गया कि पिटाई नीची जाति की हुई और डांट भी उसी को पड़ी जब उन्होंने सरपंच से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि अगर वह ऊंचे जाति वाले व्यक्ति को कुछ बोलते तो वह हमारी बात नहीं मानता और हमारी बेईज्जती होती । उन्होंने सामुदायिक मध्यस्थों से कहा कि झगड़े निपटाते समय आप दोनों की मर्जी का ध्यान अवश्य रखें । उन्होंने वर्ष 2021 का उदाहरण देते हुए बताया कि दिल्ली में मोटर दुर्घटना का एक केस मीडिएशन में डिसाइड हुआ मोटर दुर्घटना में एक नौजवान की मृत्यु हुई थी । मीडिएशन में उसकी विधवा पत्नी और उसका पिता मीडिएशन में आए और साढ़े चार लाख में फैसला हुआ । जब उनके पास एफ. आई. आर. क्वेश की पिटीशन आई तो पिटीशन में लिखा था कि साढ़े तीन लाख दे चुके हैं और एक लाख कैश कोर्ट में देना है । उसके वकील ने बताया साढे तीन लाख मिल चुके हैं । उन्होंने कहा कि जब उन्हें लगता है कि कोई गरीब परिवार से है तो तो वह उनसे व्यक्तिगत पूछते हैं उन्होंने विधवा से मिला और पूछा कि कितने पैसे मिले तो उन्होंने बताया कि दो साल पहले बीस हजार मिला और तीस हजार वकील ले गया I मेरे द्वारा साढे चार लाख परिवार को दिलवाये गए पचास-पचास हजार रुपये के माफीनामा करवाते हुए एक लाख अलग से दिवाये गए। वकील से कोरी समाज, वैश्य समाज, यादव समाज, बैरवा समाज, मुस्लिम समाज एवं सिंधी समाज के प्रतिनिधिगण द्वारा मध्यस्थता संबंधी कार्यवाही के संबंध में संक्षिप्त उद्बोधन दिया गयाI
