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बुरहानपुर। सरकार का विकास केवल कागजों पर होता दिखाई दे रहा है, ग्रामीण अंचलों में बेहतर रोजगार का दावा भी खोखला नजर आ रहा है, इन दावों की पोल उस वक्त सामने आती दिखाई देती है जब शहर के पुष्पक बस स्टैंड से सैकड़ो मजदूर अपने घर बार छोड़ कर रोजी रोजगार के लिए पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र और गुजरात की ओर पलायन करते देखे जाते हैं, जब हमारे प्रतिनिधि ने इन ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने बताया कि गांव में कोई रोजगार नहीं है मनरेगा में भी मजदूरी नहीं मिल रही है तो फिर गांव छोड़कर जाना उनकी मजबूरी बन गई है। धूलकोट और झिरपांजरीया ग्राम के ग्रामीणो से बात की तो उन्होंने बताया कि गांव में कोई रोजगार नहीं है जहां मजदूरी कर बाल बच्चों का पेट पाल सके रोजगार नहीं होने से वह महाराष्ट्र भुसावल में रोड निर्माण में मजदूरी करने पूरे परिवार के साथ जा रहे हैं वहां ठेकेदार उन्हें मजदूरी देगा। जिले का यह अकेला गांव नहीं बल्कि और भी गांव है जहां कोई काम नहीं है लेकिन नेता है कि विकास की गंगा बहाने के दावे जरूर करते सुने गए हैं। भाजपा सरकार का दावा है कि वह हर हाथ को काम देगी लेकिन मजदूरो का यह पलायन देखकर तो नहीं लगता कि गांव में हर हाथ को काम मिल रहा है जिले के आदिवासी अंचलों में रोजगार के लाले हैं जिस के चलते यहां ग्रामीण अपने पूरे परिवार के साथ पड़ोसी राज्यों में पलायन कर रहे हैं।

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