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इंदौर। संयुक्त परिवार द्वारा प्रभु चरित्रामृत श्रवण का एकीकृत प्रयास के तहत आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान महोत्सव में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह महोत्सव मनाया गया। भक्तों ने दर्शन का लाभ लिया और खुशियां मनाई।
पंडित पुष्पानंद महाराज अपने प्रवचन में कहा शरण में आने पर उनका नाम लेने से ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। सत्संग में आने पर मनुष्य की इंद्रियों का सदुपयोग होता है। हमें जब तक रहना है, कृष्ण कृष्ण कहना है। भगवान सिर्फ आनंद देते हैं लेकिन हम उनसे सारी दुनिया मांग बैठे हैं। इस तन का अहंकार मत करो ये एक दिन भस्म हो जाएगा, भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाकर संसार को ये ही संदेश देते हैं। गृहस्थ जीवन काम वासनाओं की तृप्ति के लिए नहीं उपासना के लिए है। त्रिशूल की तरह रजो और तमोगुण को नियंत्रण में रखो और सतो गुण को बढ़ाओ। जो सबकी सुनता है वह महान बनता है। वाणी पर नियंत्रण और छोटों का आदर करने वाला समाज में सम्मान पाता है और सदा आगे बढ़ता है।
स्वामीजी ने आगे कहा कि मां का सदा सम्मान करो क्योंकि मां के चरणों में ही भगवान का वास होता है। भगवान मिल जाते हैं पर मां नहीं मिलती। ऊपर जिसका अंत नहीं है वह परमात्मा है और नीचे जिसका अंत नहीं है वह मां होती है। जब जीव परमात्मा से नहीं मांगता है तो वे उसे भरपूर देते हैं।
माहेश्वरी भवन संयोगितागंज में आयोजित महोत्सव में व्यासपीठ का पूजन परवाल डॉ.सुरेश राठी, महेश राठी, श्रीमती लीलादेवी परवाल, संजय परवाल, कैलाशचंद्र परवाल, पीयूष परवाल, मनोज परवाल, सतीश मालपानी, संतोष आगीवाल और परिवार के सदस्यों ने किया।

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