
दमोह : कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर ने नरवाई प्रबंधन पर और नरवाई में आग लगाने की घटनाओं पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इस संबंध में उप संचालक कृषि दमोह जे.एल. प्रजापति ने किसान भाईयों से कहा वर्तमान में रबी की फसलें लगभग पकने की ओर अग्रसर हैं और चना, मसूर की कटाई भी शुरू हो गई है। गेहूं की फसल लगभग एक सप्ताह में पकने वाली है। किसान बंधु ज्यादातर कंबाइन हार्वेस्टर से गेहूं की फसल कटाते हैं, फसल कटने के बाद नरवाई में आग लगा देते हैं श्री प्रजापति ने किसान बंधुओं से आग्रह करते हुये कहा नरवाई ना जलाये, क्योंकि नरवाई जलाने से बहुत सारे कुप्रभाव देखने को मिल रहे हैं, जिससे हमारी जमीन की उर्वरा शक्ति भी खराब हो जाती है। हमारे जमीन में जो उपस्थित सूक्ष्मजीव हैं, वो भी नष्ट हो जाते हैं और केंचुआ जैसे हमारे जो मित्र कीट हैं, वो भी जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे हमारी जमीन बंजर हो जाती हैं। किसान बंधु नरवाई ना जलाते हुए नरवाई प्रबंधन के जो अन्य तरीके हैं, जैसे स्ट्रा रीपर से आप भूसा बनवा सकते हैं और यह अनिवार्य भी है।
श्री प्रजापति ने बताया कलेक्टर सर द्वारा निर्देश दिये गये हैं कि जो भी कंबाइंड हार्वेस्टर हमारे जिले में चलेंगे, उनमें स्ट्रा मनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रिपर होना आवश्यक है, बिना उसके दमोह जिले में कोई भी हार्वेस्टर नहीं चलेगा। किसान बंधुओं को अपनी तरफ से एक मुहिम चलाना चाहिए कि हम बिना स्ट्रा रिपर के या कंबाइंड हार्वेस्टर में बिना स्ट्रा मेंनेजमेंट सिस्टम के कटाई नहीं कराएंगे। उससे किसान भाईयों को अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त होगा। क्योंकि आप भूसा प्राप्त कर सकते हैं और इसमें किसान यदि आग जलाते हैं तो उसमें दंडात्मक कार्रवाई भी किसानों के विरूद्ध की जा सकती है। इस संबंध में एक समिति भी जिला कलेक्टर श्री कोचर ने गठित कर दी है और यदि हार्वेस्टर संचालक बिना स्ट्रा मेंनेजमेंट सिस्टम और बिना स्ट्रा रिपर के हार्वेस्टर चलाते हैं तो उन पर भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसलिए सभी किसानो से आग्रह है कि आग बिलकुल भी ना जलाये। सहायक संचालक कृषि दमोह एस.एल. कुर्मी ने सभी किसान भाईयों से आग्रह करते हुये कहा गेहूं फसल की कटाई के बाद खेतों में जो नरवाई बचेगी, उसको जलाने से मिट्टी में जो लाभकारी जीव होते हैं, वह नष्ट हो जाते हैं, और हमारी भूमि भी बंजर की तरफ बढ़ती है, इसलिए सभी किसान भाइयों से आग्रह है कि नरवाई का प्रबंध करें। खेत की उर्वरता कम होने के कारण हर वर्ष ज्यादा खाद डालना पड़ता है, इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, हमारा स्वास्थ्य खराब होता है, इसलिए बहुत सारे साधन है, नरवाई प्रबंधन के लिए, उनका उपयोग करते हुए हम अपनी खेती और स्वास्थ्य सुरक्षित रख सकेंगे।
