Spread the love

विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सदन में किये अपने विचारों को साझा

दमोह:  संविधान के अमृत महोत्सव पर “मेरा संविधान मेरा स्वाभिमान” विषय पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस ज्ञानचंद श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें राजनीति विज्ञान विभाग के स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्राचार्य डॉ आलोक जैन ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्राचार्य डॉ आलोक जैन ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वह नियमित रूप से महाविद्यालय में उपस्थित होकर न केवल अध्ययन करें बल्कि शासन के द्वारा उन्हें दी जा रही सुविधाओं का भी उपभोग करें।

            कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता और संयोजक डॉ इन्दिरा जैन ने संविधान की मूल आत्मा उसकी भावना, उद्देश्य, उसके लक्ष्य, और उसमें किए गए नागरिक और व्यक्तियों के लिए प्रावधान पर विस्तृत चर्चा की उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि उसमें हर नागरिक और व्यक्ति को प्रतिष्ठा और गरिमा के साथ जीने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना की अंतिम पंक्ति में उल्लेखित तीन शब्द अंगीकृत अधिनियमित और आत्मअर्पित में से अंतिम शब्द आत्माअर्पित होना अभी बाकी है।  डॉ एन आर सुमन ने कहा कि संविधान अपरिपक्व नहीं परिपक्व सर्वोच्च विधान है। इसकी सफलता इसी बात में है कि आज तक हमारे देश में संविधान, विधि, विधान, शासन प्रशासन के खिलाफ कोई क्रांति नहीं हुई। संविधान के लचीलेपन ने सामाजिक परिवर्तन के अनुकूल हर चीज को समाहित किया है। शासकीय आदर्श महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डां कीर्ति काम दुबे ने कहा कि संविधान हमें अधिकार और कर्तव्य दोनों देता है पर हम जितने लालायित अधिकारों के लिए दिखाई देते हैं उतना ही कर्तव्यों के प्रति होना अनिवार्य है।  संस्कृत के सहायक प्राध्यापक जितेन्द्र धाकड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि धर्मशास्त्र पहले आये संविधान बाद में पर संविधान में सभी धर्म ग्रन्थों, हमारी संस्कृति और सभ्यता को समाहित किया गया है।  धीरज जांनसन ने  चार आश्रमों की बात कही उन्होंने कहा कि मैं तो वानप्रस्थ की ओर हूं पर आप विद्यार्थी ब्रह्मचर्य में है  क्या आप अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रहे हैं, यह चिंतन का विषय है। डॉ सिकंदर डुलगज ने कहा कि संविधान सिर्फ लोकतंत्र की ही नहीं हम सभी की आत्मा है। हमारी रक्त वाहिनी है संजीवनी है। संविधान सभा में अतिशय मंथन के बाद यह अमृत देश को प्राप्त हुआ है। इस दौरान राजनीति विज्ञान विभाग के स्नातकोत्तर  कक्षाओं के विद्यार्थी निधि मिश्रा,सारिका पाठक, मोहिनी पटेल,अनुप्रिया सिंह राजपूत,हीरा अहिरवाल,प्रशांत पटेल, श्रेया सोनी,अनुराग पटेरिया,श्री राम अहीरवाल,दीपक चौधरी, निशांत मेहरा,अनमोल जैन, और शिवा पाठक ने भी भारतीय संविधान पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ अनिल जैन ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *