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नक्सल उन्मूलन में लगे जवानों का नक्सलियों से हुआ आमना-सामना
मृत नक्सलियों के पास से ग्रेनेड लांचर, एसएलआर रायफल, बड़ी मात्रा में गोला बारूद जब्त
सोनेवानी पुलिस चौकी के पचामा-दादर व कटेझिरिया के जंगल में हुई मुठभेड़

बालाघाट। नक्सल उन्मूलन में लगे जवानों को एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। जवानों ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पचामादादर एवं कटेझिरिया के जंगल में हॉकफोर्स, जिला पुलिस बल एवं सीआरपीएफ के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ में एमएमसी जोन के जीआरबी डिविजन के चार नक्सलियों को मार गिराया है। जिसमें तीन महिलाएं और एक पुरुष नक्सली शामिल है। नक्सलियों से ग्रेनेड लान्चर, एसएलआर राइफल, दो .315 बोर राइफल, बड़ी मात्रा में गोला बारुद, वॉकी-टॉकी सेट, नक्सल साहित्य को बरामद किया गया है। घटना के बाद से जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। 600 से अधिक जवानों ने जंगल में मोर्चा संभाला हुआ है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार रुपझर थाना क्षेत्र के सोनेवानी चौकी अंतर्गत पचामा-दादर व कटेझिरिया के जंगल में जीआरबी डिविजन (गोंदिया, राजनांदगांव, बालाघाट) के नक्सलियों के एक समूह के होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर हॉकफोर्स, जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के जवानों द्वारा 13-14 जून की दरमियानी रात्रि से जंगलों में कार्डन व सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इस दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को हताहत करने और उनके हथियार को लूटने की नियत से जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जवानों ने भी अपनी सूझबूझ से जवाबी फायरिंग की। इस कार्यवाही में 4 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराने में सफलता मिली है।
अन्य नक्सलियों के घायल, मृत होने की संभावना
अधिकारियों ने संभावना जताई है कि इस मुठभेड़ में और भी नक्सली या तो घायल हुए हैं या फिर उनकी मौत हुई है। जिनकी तलाश के लिए जिला पुलिस बल, हॉकफोर्स और सीआरपीएफ के जवानों द्वारा वृहद पैमाने पर सर्चिंग अभियान चला रहे हैं। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में सर्चिंग बढ़ा दी गई है। पुलिस की माने तो मुठभेड़ के दौरान नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए।
6 माह में ही 10 नक्सलियों को किया ढेर
जिले में नक्सल उन्मूलन में लगे जवानों ने महज 6 माह में ही 10 नक्सलियों को ढेर कर दिया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में 14 जून तक 10 हार्डकोर इनामी नक्सलियों को मार गिराने में जवानों को सफलता मिली है। नक्सलियों के मारे जाने का यह आंकड़ा वर्ष 2022 की तुलना में अधिक है। वर्ष 2022 में एक वर्ष सर्वाधिक 6 नक्सलियों को ढेर किया गया था।
उल्लेखनीय है कि नवागत पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्र ने बालाघाट एसपी का पदभार 11 जून को ग्रहण किया है। पदभार ग्रहण करने के दौरान उन्होंने मिशन 2026 को प्राथमिकता बताते हुए बालाघाट ने नक्सलवाद से उन्मूलन की बात कही थी। वहीं पद संभालने के महज चार दिन के भीतर जवानों को बड़ी सफलता मिली है।
19 फरवरी को एक कमांडर, तीन एसीएम को एक साथ किया था ढेर
जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुपखार रेंज के रौंदा जंगल क्षेत्र में 19 फरवरी को नक्सलियों और पुलिस जवानों का आमना-सामना हुआ था। इस मुठभेड़ में जवानों ने चार तीन राज्यों के इनामी हार्डकोर महिला नक्सलियों को मार गिराया था। जिसमें एक कमांडर और तीन एसीएम रैंक की महिला नक्सली शामिल थी। मुठभेड़ में भोरम देव एरिया कमेटी की कमांडर आशा दक्षिण बस्तर जिला सुकमा छग की निवासी, एसीएम रंजीता उर्फ रमली अलमी निवासी ग्राम तुमरीवाल, तहसील मारदपाल जिला कोंडागांव छग, सरिता उर्फ शीला उर्फ पदम निवासी पेंटा थाना जगरगुंडा जिला सुकमा और लख्खे मरावी निवासी सुकमा भी मारी गई थी। आशा पर 12 लाख रुपए का इनाम घोषित था। जबकि एसीएम रंजीता, सरिता और लख्खे मरावी पर 14-14 लाख रुपए का इनाम घोषित था। आशा के पास से जवानों ने इंसास रायफल जब्त किया था। रंजीता के पास से एसएलआर रायफल, सरिता के पास से प्वाईंट .303 रायफल और लख्खे के पास से .315 बोर की रायफल जब्त की गई है।
मिशन-2026 पर कर रहे कार्य
भारत सरकार ने मिशन-2026 तैयार किया है। जिसके तहत मार्च 2026 तक नक्सल समस्या को पूर्णत: समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी लक्ष्य के आधार पर नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। योजनाएं तैयार कर उस पर अमल किया जा रहा है। ताकि नक्सलियों का सफाया हो सकें। मिशन-2026 के लक्ष्य के अनुसार जिले में जवानों को सफलता भी अच्छी मिल रही है। नक्सलियों के खिलाफ जारी इस अभियान से राज्य सरकार और पुलिस को जल्द ही जिले से माओवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की उम्मीद है।
एक दर्जन से अधिक टीम कर रही सर्चिंग
मुठभेड़ के बाद एक दर्जन से अधिक टीम सर्च ऑपरेशन के लिए जंगलों में उतर गई है। हॉकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और जिला पुलिस बल के जवानों ने समीपस्थ क्षेत्रों में सर्चिंग तेज कर दी है। सर्च अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य के जवानों से आपसी समन्वय स्थापित कर ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है।

1990 से जीआरबी डिवीजन है सक्रिय
जिले में वर्ष 1990 से जीआरबी डिवीजन सक्रिय है। इस डिवीजन के नक्सली अलग-अलग गूटों में अपना मूवमेंट करते हैं। इसके अलावा कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र में बालाघाट व मंडला जिले में केबी डिवीजन के नक्सली सक्रिय हैं। हालांकि, पुलिस इन नक्सलियों को माकूल जवाब देने के लिए हमेशा तत्पर रहती है। डिंडोरी जिला भी अब नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शामिल है। लेकिन वहां नक्सलियों मूवमेंट कम है। बालाघाट और मंडला जिला काफी प्रभावित है।

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