अमरपाटन तहसील की 6 पंचायतों को रीवा में मिलाने की तैयारी

विरोध में एक साथ उतरे भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता
भोपाल । मैहर और रीवा जिले की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। दरअसल, मैहर के अमरपाटन तहसील की 6 पंचायतों को रीवा में मिलाने की तैयारी चल रही है। आधिकारिक कार्रवाई की बात सामने आने के बाद से स्थानीय लोगों के साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एक स्वर में मुखर होकर इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा करके मैहर जिले की मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को रीवा में शामिल करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस विधायक डॉ। राजेंद्र कुमार सिंह ने इसके पीछे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का हाथ बताया है।
मैहर जिले की मुकुंदपुर, आनंदगढ़, आमिन, धोबहट, परसिया और पपरा पंचायतों को रीवा में शामिल करने की आधिकारिक कार्रवाई शुरू हो गई है। मिली जानकारी के मुताबिक इसका प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के माध्यम से प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग तक पहुंचा है। आयोग ने हाल ही में मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ से इन पंचायतों की स्वीकृति की जानाकारी मांगी थी। इसके बाद मैहर कलेक्टर ने 7 अगस्त को एडीएम के माध्यम से इस पत्र को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद से ही विंध्य की राजनीति गरमा गई। स्थानीय लोग इसके विरोध में आ गए।
मर्जर की मुख्य वजह व्हाइट टाइगर सफारी तो नहीं
स्थानीय लोग इस मर्जर को मैहर के मुकुंदपुर स्थित दुनिया की पहली व्हाइट टाइगर सफारी को रीवा में शामिल करने की साजिश बता रहे हैं। बता दें कि अक्टूबर 2023 से पहले जब मैहर जिला नहीं बना था, तब सफारी सतना जिले में थी। उस समय भी सरकारी पोर्टल पर सफारी को रीवा में दर्शाने को लेकर विवाद खड़ा हो चुका था। 5 अक्टूबर 2023 को मैहर जिले के गठन के बाद भौगोलिक तौर पर यह व्हाइट टाइगर सफारी मैहर में शामिल हो गई, लेकिन आधिकारिक पोर्टल पर आज भी यह रीवा जिले में ही है।
बीजेपी सांसद ने बताई साजिश की वजह
सतना से भाजपा के सांसद गणेश सिंह भी इस प्रस्ताव के खिलाफ में उतर गए हैं। उन्होंने इसे पहचान छीनने की साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है मैहर की 6 पंचायतों को रीवा में शामिल करने का प्रस्ताव एक साजिश है, मैं इसके खिलाफ हूं और इसका पुरजोर विरोध करता हूं। कांग्रेस विधायक डॉ। राजेंद्र कुमार सिंह ने इसे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की चालाकी करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले ही अमरपाटन के साथ कई अन्याय किए हैं। मौहारी कटरा राजस्व परिक्षेत्र को अमरपाटन से काटकर रामपुर बघेलान में जोड़ दिया गया। इसके अलावा अमरपाटन की जनता की इच्छा के खिलाफ सतना से अलग करके मैहर में जोड़ देना जैसे कई अन्याय हुए हैं।
मैहर की शान है व्हाइट टाइगर सफारी
मैहर के भाजपा विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने भी विरोध जताते हुए कहा कि मुकुंदपुर की विश्वस्तरीय व्हाइट टाइगर सफारी मैहर की शान है। इसे अलग नहीं किया जा सकता। वही, पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल ने इस इलाके को अमरपाटन की धरोहर बताते हुए रीवा में विलय को पूरी तरह खारिज किया है। इसके अलावा मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने सीधे डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला पर आरोप लगाते हुए इसे छीनने का प्रयास कहा और कोर्ट और जन आंदोलन के जरिए संघर्ष का ऐलान किया है।
दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर का ठिकाना था मुकुंदपुर
दुनिया के पहले सफेद बाघ मोहन का ठिकाना मुकुंदपुर को बताया जाता है। इसके चलते मुकुंदपुर में ही व्हाइट टाइगर सफारी बनाई गई है। दरअसल, रीवा के महाराजा मार्तंड सिंह ने 27 मई 1951 को मोहन को सीधी जिले के बरगदी क्षेत्र से पकड़ा था। जिसे उन्होंने रीवा के गोविंदगढ़ पैलेस में रखा था। जहां से वह अगले दिन भाग निकला और फिर काफी खोजबीन के बाद रीवा से लगभग 27 किलोमीटर दूर मुकुंदपुर क्षेत्र में पकड़ा गया। इसके बाद मोहन 2 दशकों तक यहीं रहा और इसकी संतानें धीरे-धीरे देश दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंच गई। मोहन टाइगर को दुनियाभर के सफेद बाघों का प्रथम पूर्वज माना जाता है। मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी मैहर जिले के अमरपाटन तहसील के ताला अंतरघाट स्थित मुकुंदपुर गांव में स्थित है। मैहर जिला बनने से पहले यह सफारी सतना जिले में थी।
