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रीवा मेडिकल कॉलेज में फर्जी सर्टिफिकेट से लिया था एडमिशन

नीट यूजी के मॉपअप राउंड में फर्जी सर्टिफिकेट मामले में नया खुलासा
भोपाल। कोहेफिजा थाना पुलिस द्वारा दर्ज किये गये नीट यूजी के मॉपअप राउंड में फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में कई चौकांने वाले खुलासे हुए है। गिरोह का मास्टरमाइंड सुमित चौधरी कोई और नहीं बल्कि रीवा मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस का छात्र था। सुमित ने दो साल पहले फर्जी दस्तावेजों से ही एडमिशन लिया था। जब वह खुद नहीं पकड़ाया तब उसने दूसरे राज्यों के छात्रों को भी इसी तरीके से एडमिशन दिलाना शुरू कर दिया। इसके बाद भी जब वह पकड़ में नहीं आया तब उसने नेटवर्क तैयार करते हुए पूरा गिरोह बना लिया। आरोपी पैसो को किराए के बैंक खातों में ट्रांसफर कराता था। गौरतलब है की कुछ सर्टिफिकेट फर्जी मिलने के बाद कोहेफिजा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर सहरसा, बिहार के हिमांशु कुमार और मुंबई की क्रिस्टल डी कोस्टा को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियो ने बीएचयू के फर्जी पीएच सर्टिफिकेट, भोपाल पते वाला आधार और मप्र का मूल निवासी प्रमाण पत्र लगाया था। पुलिस अब तक हिमांशु के पिता डॉ. शिलेंद्र कुमार, क्रिस्टल के पिता क्लाइव डी कोस्टा, रवि कुमार, रविकर सिंह, डॉ. राहुल राज, नवल कुमार यादव, पंकज कुमार शाह, कौशल कुमार, अमित कुमार और साजिद गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। आरोपी क्लाइव डी कोस्टा ने बेटी क्रिस्टल के फर्जी दस्तावेज बनवाने के लिए 15.50 लाख रुपए सात खातों में ट्रांसफर किए थे। इनमें नवल, पंकज और कौशल के बैंक खाते शामिल थे।

  • हाई प्रोफाइल है पकड़े गये कई आरोपी
    जानकारी के अनुसार पकड़े गये दर्जन भर आरोपियो में शामिल शिलेंद्र कुमार सुपौल और सहरसा में दो नेत्र चिकित्सालय चलाते हैं। उन्होनें जानबूझकर बेटे हिमांशु के फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। वहीं आरोपी रवि कुमार जो डॉ. शिलेंद्र के सुपौल क्लीनिक में उनका सहायक था। उसके खाते में आयुष्मान योजना की रकम आती थी, और उसी ने हिमांशु के लिए गिरोह को पैसा उपलब्ध कराया था। गाजियाबाद में रहने वाले आरोपी रविकर सिंह मूलरूप से आरा का है, और उसी ने क्रिस्टल डी कोस्टा के फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने की प्रक्रिया की। क्लाइव डी कोस्टा मुंबई की हीरा कंपनी में अधिकारी है,जिन्होनें बेटी क्रिस्टल के लिए 7 खातों में 15.50 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। आरोपियो में शामिल डॉ. राहुल राज एमबीबीएस के बाद रीवा मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहा था। सुमित चौधरी ने उसे लालच दिया जिसके बाद वह एडमिशन पाने वाले छात्रों की तलाश कर गिरोह तक पहुचांता था। गिरोह छात्रों को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिलाने के लिए फ्रीडम फाइटर, ईडब्ल्यूएस, विकलांगता जैसी श्रेणियों के फर्जी और कूटरचित प्रमाणपत्र तैयार कराता था।
  • बैंक एकाउंट किराये पर देने वाले भी पहुचें सलाखो के पीछे
    पकड़े गया आरोपी नवल कुमार यादव सिवान का रहने वाला है, जो दिल्ली में कोचिंग चलाता है। उसने अपना और अपने भाई का बैंक एकाउंट गिरोह को किराए पर दिया था। वहीं दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करने वाले पंकज कुमार ने अपने दो बैंक खाते और कौशल कुमार ने अपना एक बैंक खाता गिरोह को दिया इन एकाउंट से लाखो का लेनदेन हुआ है। दिल्लि के नोएडा में रहने वाला आरोपी अमित कुमार: सिवान का है। वह गिरोह को अपनी क्रेटा कार 5 हजार रुपए रोजाना के हिसाब से किराए पर देता था। सीवान का ही रहने वाला साजिद नोएडा में रहता है। वो अमित के साथ कार का किराया लेता था। सहरसा के छात्र आरोपी हिमांशु कुमार ने मॉप-अप राउंड में फर्जी दस्तावेज लगा कर एडमिशन लेने का प्रयास किया था। क्रिस्टल डी कोस्टा मुंबई की छात्रा है। उसने बीएचयू के फर्जी पीएच सर्टिफिकेट और एमपी के फर्जी दस्तावेज पेश कर प्रवेश लेने की कोशिश की।

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