Spread the love

पत्नी पर अफेयर कबूलने का दबाव मानसिक क्रूरता

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाकर पति-पत्नी की शादी को खत्म कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी पर पति के विवाहेतर संबंध को स्वीकार करने और दूसरी महिला को ‘छोटी बहन’ मानने का दबाव डालना गंभीर मानसिक क्रूरता है। अदालत के मुताबिक, ऐसा व्यवहार वैवाहिक रिश्ते की बुनियाद माने जाने वाले भरोसे और सम्मान को पूरी तरह खत्म कर सकता है।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटकर कहा कि निचली अदालत ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया। वैवाहिक मामलों में तथ्यों को ‘संभावनाओं की प्रबलता’ के आधार पर जांच करना जरूरी है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि शादी आपसी विश्वास, साथ और साझा अनुभवों पर टिकी होती है। जब यह विश्वास टूट जाता है, तब रिश्ते को फिर से संभालना बेहद मुश्किल होता है।
मामले के अनुसार, दोनों पक्ष पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी शादी फरवरी 2018 में हुई थी और वे धनबाद में साथ रहते थे। पति टुंडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत था, जबकि पत्नी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में नौकरी करती थीं। सितंबर 2019 से दोनों अलग रहने लगे थे।
पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति का एक विधवा महिला के साथ विवाहेतर संबंध था। परिवार के हस्तक्षेप के बाद पति ने आश्वासन दिया था कि वह उस विधवा महिला से संपर्क खत्म कर देगा, लेकिन कथित तौर पर पति ने संबंध जारी रखा। पत्नी के विरोध करने पर उससे मारपीट की, जिससे उन्हें स्लिप-डिस्क और ट्रॉमैटिक ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।
पति ने आरोपों से इंकार कर पत्नी के पिता के क्लिनिक से जारी मेडिकल पर्चों को फर्जी बताया था। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल क्लिनिक के पारिवारिक संबंध के आधार पर मेडिकल दस्तावेजों को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि पति के व्यवहार के कारण पत्नी को वैवाहिक घर छोड़ना पड़ा। इस तरह कोर्ट ने विवाह को समाप्त करने का फैसला सुनाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *