केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

नई दिल्ली। विधायकों के इस्तीफा देकर दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने और दूसरी पार्टी में शामिल होकर फिर चुनाव लड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तमिलनाडु से जुड़े मामले में कदम उठाया। याचिका में इसतरह के विधायकों के दोबारा चुनाव लड़ने और उपचुनाव पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
मामला तमिलनाडु के छह विधायकों से जुड़ा है, जिन्होंने अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के टिकट पर चुनाव जीता था। आरोप है कि इन विधायकों ने विधानसभा में तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार के विश्वास मत के पक्ष में मतदान कर पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया। उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की कार्यवाही लंबित थी। तभी सभी छह विधायकों ने इस्तीफा दे दिया, जो कि तमिलनाडू विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद में वे 6 सदस्य सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो गए। याचिकाकर्ता के. सुथान ने मद्रास हाई कोर्ट के 24 सितंबर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि विधायक अयोग्यता से बचने के लिए इस्तीफा देकर दल-बदल विरोधी कानून के उद्देश्य को कमजोर करते हैं। इस घटना से मतदाताओं के विश्वास को ठेस पहुंचती है और उपचुनाव कराने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ सरकारी खजाने पर पड़ता है। याचिका में मांग की गई है कि इस्तीफा देकर फिर चुनाव लड़ने वाले विधायकों से उपचुनाव कराने पर होने वाले सार्वजनिक खर्च के बराबर राशि जमा कराने की व्यवस्था करे। याचिकाकर्ता ने पहले मद्रास हाई कोर्ट में इन विधायकों को पांच साल के लिए अयोग्य ठहराने की मांग की थी, लेकिन याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होने की उम्मीद है।
