न्यूजरूम का कामकाज ठप हो जाएगा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र को यह नोटिस जारी किया। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलीलें दीं। उन्होंने बेंच के सामने कहा कि इन प्रावधानों से न्यूजरूम का कामकाज ठप हो जाएगा।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि यह कानून संविधान के तहत मिले सूचना के अधिकार और बोलने व अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मौलिक अधिकारों को सीमित करता है। एसोसिएशन का कहना है कि इस कानून के कारण पत्रकारों के लिए गड़बडिय़ों और गलत कामों की जांच करना मुश्किल हो सकता है। संगठन का कहना है कि डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन कानून के प्रावधान प्रेस की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाते हैं। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने डीपीडीपी एक्ट की धारा 7, 17(2), 18, 19, 27, 29, 36, 37 और 44(3) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। याचिका में डीपीडीपी नियम, 2025 के नियम 16, 17 और 23 को भी चुनौती दी गई है। गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले साल यूजर्स के डिजिटल पर्सनल डेटा की सुरक्षा के लिए एक प्राइवेसी कानून लागू करने की घोषणा की थी। इससे मेटा और गूगल जैसे प्लेटफॉम्र्स के लिए नियमों का पालन करने की शर्तें और सख्त हो गई हैं। प्रकाशक का कहना है कि चूंकि मीडिया संस्थानों को इस कानून से कोई छूट नहीं दी गई है, इसलिए यह प्रेस की आजादी में दखल है।
