
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
कोटा । राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय झालावाड़ में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मोतीलाल रिणवा के द्वारा झूठे शपथ पत्र और फर्जी दस्तावेज के द्वारा नौकरी लगने का मामला सामने आया है। इस संबंध में न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 2, कोटा के आदेश पर थाने में मामला दर्ज हुआ है। कोर्ट के आदेश से दर्ज एफआईआर में मोतीलाल, उनके बेटे हर्ष व कमला सरपंच निवासी डेगाना नागौर को आरोपी बनाया है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 16 साल तक एक असिस्टेंट प्रोफेसर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से नौकरी करता रहा। लेकिन किसी ने भी इस पर कार्रवाई नहीं की। संतानों के भिन्न-भिन्न जन्म और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाण पत्र कैसे बने यह जांच का विषय है? अधिकारीयों की मिलीभगत से इस अपराध को अंजाम दिया गया है। अब कोर्ट के आदेश से मामला दर्ज हुआ है।
वकील ने बताया कि मामले में अभी पहला मुकदमा दर्ज होने के आदेश हुए है। पहले भी लीगल नोटिस द्वारा मामले को राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय झालावाड़ तथा राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) कोटा के संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। यह मुकदमा उन्हें दर्ज करवाना चाहिए था। लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उल्टा आरोपी को बचाया। जिन-जिन अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने अथवा छुपाने में मदद की गई। उनपर भी मुकदमा दर्ज करवाकर जांच होगी और नियमनुसार वसूली भी होगी।
आरोपी मोतीलाल रिणवा असिस्टेंट प्रोफेसर यांत्रिकी विभाग झालावाड इंजीनियरिंग कॉलेज ने जॉइनिंग के 4 साल बाद 2012 में संतान संबंधी शपथ पत्र दिया था। शपथ पत्र में पांच बच्चों के जन्म के बारे में जानकारी दी। जिसमें सबसे छोटे बेटे का जन्म अप्रैल 2002 का बताया गया। जबकि सबसे छोटे बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र उसके जन्म के 10 साल बाद 2 मई 2012 को व संस्थान में शपथ पत्र देने के मात्र 8 दिन पहले 10 मई 2012 को जारी हुआ। जबकि सबसे छोटे बेटे की माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा जारी की गई मार्कशीट में जन्म तारीख अप्रैल 2006 है। शपथ पत्र में दी गई जानकारी व मार्कशीट में अंकित डेट ऑफ बर्थ में 4 साल का अंतर है।
