
परिजन नहीं आए मोक्ष ने किया 3 बेसहारा शवों का अंतिम संस्कार
जबलपुर। मोक्ष संस्था द्वारा गत दिवस तीन ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार किया गया जिनके परिजन होते हुए भी वे लावारिस के हालात में मिले, इनके साथ ही एक ऐसे बुजुर्ग को आश्रय दिया गया जिनके परिजन मेडिकल में उपचार के लिए लाए और यहीं छोड़ कर चले गए। जिन बुजुर्गों का अंतिम संस्कार मोक्ष ने किया उनमें से एक के परिजन जहां महाकुंभ में होने का हवाला देकर नहीं आए वहीं दूसरे मृतक के परिजनों ने शहर से दूर होने का हवाला देकर किनारा कर लिया, एक मृतक के परिजन तो थे लेकिन उनके पास अंतिम संस्कार करने पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं थीं। मोक्ष संस्था के आशीष ठाकुर ने बताया कि रक्त संबंधों में आई इस तरह की दूरियां, बेपरवाही न सिर्फ अनेक सवाल उठा रही हैं बल्कि खत्म होती मानवीय संवेदनाएं रक्त संबंधों पर भी एक बार पुन: मंथन की बात कह रहे हैं।
बीती देर रात मोक्ष को पुलिस के माध्यम से सूचना मिली की लार्डगंज थाना क्षेत्र निवासी प्रभा वनवासी के पति 75 वर्षीय हरीशचंद्र बनवासी का शव मिलने की सूचना मिली। वे परिवार से पृथक होकर यहां रह रहे थे। शव 24 घंटों से कमरे में पड़ा था। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की सूचना पर पहुंचे मोक्ष के सदस्यों ने मेडिकल में पीएम के बाद अंतिम संस्कार से पूर्व परिजनों को सूचना दी तो उन्होंने बताया कि सभी प्रयागराज में महाकुंभ स्नान के लिए पहुंचे हैं आ पाना संभव नहीं हैं। पुलिस और सहयोगियों की मदद से मोक्ष संस्था सदस्यों द्वारा अंतिम संस्कार किया गया। इसी तरह हनुमानताल थानांतर्गत मृत अवस्था में मिले 75 वर्षीय राजेंद्र गुप्ता का शव लावारिस हालात में मिला। सूचना पर मौके पर पहुंचे मोक्ष सदस्यों ने जब परिजनों से संपर्क किया तो वे रिश्तों में दूरियां गिनाते रहे। किसी तरह भतीजा मोक्ष सदस्यों के साथ अंतिम संस्कार करने आया तो लेकिन मुखाग्नि देने से इनकार कर दिया। मोक्ष संस्था सदस्यों ने अंतिम संस्कार किया। इसी तरह अंधमूक बाइपास हनुमान मंदिर के बगल में बने झोपड़ी में 45 वर्षीय माया बाई का शव लावारिसी के हालात में मिला। राहगीरों की सूचना पर पहुंचे मोक्ष सदस्यों ने जब पूछताक्ष में पाया कि उनका पुत्र शंकर मजदूर का कार्य करता हैं। उसने बताया कि निर्धनता की वजह से वह माँ का उपचार तक नहीं करा पाया अंतिम संस्कार के लिए भी उसके पास पैसे नहीं थे। मोक्ष सदस्यों ने अपने स्तर पर संसाधन जुटाते हुए मृतका का अंतिम संस्कार किया। इसी तरह नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने लाकर 55 वर्षीय भूपेन सोनी को उनके परिजन यहीं छोड़ कर चले गए। परिजनों से चर्चा करने पर उन्होंने व्यवस्था न होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। निराश्रित भूपेन सोनी को मोक्ष आश्रय में आश्रय दिया गया। तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार चौहानी एवं तिलवारा मुक्तिधाम में किया गया। इस दौरान मोक्ष संस्था के आकाश कोरी प्रशांत निशाद सौरभ ठाकुर भानु दीक्षित, विमल पटेल, ठाकुर एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे।
